कट्टर हु न हैवान हु, इस देश का सच्चा मुसलमान हूँ।
धधकता है मेरे दिल मे ज्वालामुखी देश के गद्दारो के लिए।
आखिर मैं भी एक जवान मुसलमान हूँ।
रोता है मेरा भी दिल, जब सखा कहते है ए दोस्त। तू कैसा मुसलमान है।
मैं तो देश की मिट्टी को भी चूमता हूँ, पांच वक़्त
ये देश ही मेरा अभिमान है, हाँ मैं एक सच्चा मुसलमान हुँ।
भीगी थी मेरी भी पलके जब हुए थे, शहीद मेरे वतन के रखवाले
आग मेरे दिल मे लगी थी, आंखों में थे दुश्मनों के लिये नफरतों के जवाले
हाँ मैं भी एक इंसान हूं, इस देश का सच्चा मुसलमान हुँ।
न उठाओ सवाल ऐ दोस्तो, हमारे ईमान पर
हम अपने नबी की उम्मते अजान है
इस देश के सच्चे मुसलमान है।
तारिख गवाह है , जब मौका मिला वतन पर कुर्बान होने का।
हिंदुस्तान के लिए सर भी कटा दिया, चढ़ गए सूली।
न बदल पाया कोई ईमान हमारा
इस देश की मिट्टी का ये गुमान है।
इस देश का सच्चा मुस्लमानहुँ।
चंद लोगो की फितरत से न लगाओ अनुमान
हमारे , जमीर का, रंग , रूप, जात, धर्म, देखकर नही करते हम पहचान इंसानो की
इस दिल मे धड़कता हिंदुस्तान है....।
तुम्हे होगी हमारी अजान से नफरत
हमे तो तुम्हरी राम राम पर भी गुमान है।
बस इतना ही कहूंगा दोस्तो
सांस भी लूं तो लबो पर हिंदुस्तान आता है
मेरी आंखों में फिर वो पुराना हिंदुस्तान जगमगाता है।
पठान कनपुरिया@शाहिद पठान
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