कानपुर। कई देशों से होते हुए कोरोना (कोविड19) वायरस ने जब अपने देश में दस्तक दी थी तो किसी ने नहीं सोंचा होगा कि इस वायरस के फैलने की सबसे बड़ी वजह तब्लीगी जमातियों की लापरवाही बन जायेगी। इसका सीधा असर कई प्रदेशों में पड़ा तो वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तब्लीगी जमातियों की ट्रैवल हिस्ट्री ने कोहराम मचा दिया है। बात अगर कानपुर की करे तो शनिवार तक यहां कोरोना के 150 से ज्यादा केस सामने आ गये है। जिस तेजी से जांच हो रही है उससे मामला और बढ़ना तय है। प्पर इन सब के बीच सबसे ज्यादा खौफ पैदा करने वाली बात है वह यह कि कोरोना ने मदरसे के बच्चों को अपनी चपेट में ने लिया है। दरअसल खौफ पैदा करने वाली बात इसलिये भी है कि ज्यादातर मदरसों के बच्चों के खाने पीने का इंतजाम इलाकाई लोगों समेत मदरसा संचालक करते है। बड़ा सवाल उठता है कि जिन बच्चों में कोरोना वायरस मिला है क्या वह बच्चे भी कुरानख्वानी, फातिहा समेत अन्य धार्मिक कार्यो में मदरसे के बच्चों के बुलाया जाता है। कोरोना के पैर पसारने के बाद हॉट स्पॉट वाले क्षेत्रों में भी मदरसे के बच्चों को खाने पर या अन्य कार्यो के लिये बुलाया गया है तो यह चिंता की बात है। प्रशासन को यह पता करना चाहिये कि मदरसे के जो बच्चे कोरोना संक्रमित है क्या वह भी अन्य मदरसों की तरह हर रोज डोर टू डोर खाना लेने जाते थे। या फिर इस बीच धार्मिक कार्यो के लिये किनके किनके घर गये। क्योंकि अगर इन बच्चों की ट्रैवल हिस्ट्री नहीं खंगाली गयी तो आने वाले वक्त में कई एरिया कोरोना की चपेट में आयेंगे। वहीं जिन क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय मदरसे के बच्चों को खाना मुहैया कराते थे या किसी धार्मिक कार्य के लिये बुलाया था उन्हें भी जांच करानी चाहिये। इसमें रोशन नगर समेत हॉट स्पॉट वाले क्षेत्र ज्यादा एक्टिव रहते थे।
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