#कानपुर में पिटता मुसलमान# या सोशल मीडिया का प्लान

 अरे भई मजा आ गयी.. टोपी वालों को उनकी बस्ती में घुस कर पुलिस ने जमकर कुटाई कर दी.. बड़े आये थे कोरोना योद्धाओं पर पत्थर चलाने वाले... कुछ ऐसे ही कमेंट और वीड़ियो लगातार सोशल मीडिया में वायरल हो रहे है. मानों कोरोना सिर्फ मुसलमानों की ही देन हो.. अमेरिका, चीन, यूरोपियों देशों में भले ही इस वायरस के लिये किसी को जिम्मेदार न ठहराया गया हो पर अपने देश खास कर कानपुर शहर में कोरोना संक्रमण के लिये समुदाय विशेष को मुजरिम से ठहरा दिया गया हो। इन सब के बीच सरकारा का निकम्मपन भी छूप गया। अब बात करते है दूसरे पहलू की.. बजरिया में कोरोना योद्धाओं और पुलिस पर पथराव की घटना बेहद शर्मनाक है.. रमजान के पाक महिने में युवाओं की टोली ने जिस तरह से पत्थर चलाये उसके पीछे का सच प्रशासन तक आ चुका है.. पर समुदाय विशेष के लिये एक कौम ने जो नफरत का चश्मा पहना है, और उसे सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहा है। क्या वह सही है,उनके हिसाब से सही ही होगा। मै एक पत्रकार हूं और गलत सही को समझने के बाद कहने से नहीं चूकता.. शहर में कोरोना संक्रमित सैकड़ों लोग मिले है जिनमें समुदाय विशेष की तादात बेशक ज्यादा है जिसका खमियाजा पूरा शहर भुगत रहा है।पर इसका ठीकरा एक समुदाय पर फोड़ने वाले ये बताये कि उनकी क्या औकात है जो वे किसी को कुसुरवार ठहराये.. जिन समुदाय विशेष लोगों से सभी दूरी बना रहे है.. तो बाकी के वे लोगों कैसे पाजिटिव हो गये, जबकि वे न तो मस्जिद गये, न मदरसे और न मुस्लिम बस्तियों में..कुछ लोगों कहना है कि मुस्लिम फलों पर थूक लगाकर बेंचते है और कोरोना जिहाद को अंजाम दिया जा रहा है. जाहिलों को ये बात समझ नहीं आती ऐसा करने वाला और उसका परिवार कहां से सुरक्षित है और कौन ऐसा होगा जो खुद को परिवार की जान जोखिम में डालेगा। मेरी उन सभी लोगों से गुजारिश है जो कोरोना जैसे लक्षण से ग्रासित है वे सामने आये और कौम को बदनाम न होने दे.. और उन मित्रों से भी जिन्होंने जाति विशेष का चश्मा पहन रखा है.. उन्हें बता दू कि मुसिबत में एक दूसरे के काम इंसान आयेगा, हिंदू या मुसलमान नहीं
साभार बर्निंग न्यूज का मेरे विचारों को प्रसारित करने के लिये-¨  pathan

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