कानपुर से गोरखपुर तक एक ही नाम मजदूरों का मददगार बब्लू यादव उसका नाम

कहते है काबलियत किसी की मोहताज नहीं होती.. जो काबिल है और इंसानियत का परिचय दे रहा है उसकी शख्सियत खुद खुदा लिखता है। कानपुर से गोरखपुर की सरजर्मी तक ऐसा ही एक नाम आजकल सुर्खियों में है। सोशल मीडिया से लेकर दूसरे प्रदेश में फंसे ऐसे कई मजदूरों के लिये मदद करने वाले उस मसीहा को पूर्व जिलां पंचायत सदस्य बब्लू यादव के नाम से लोग जानते है। अपनी मां को दिये वचन कि हमेशा गरीबों की मदद करेंगे उसे निभा रहे बब्लू यादव कोरोना काल में लगातार भूखों को खाना, और पैसा देकर मदद कर रहे है। कानपुर के डीएवी विधि  महाविद्यालय से पढ़ाई के दौरान राजनीति में उतरे बब्लू यादव ने जब जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता था तो तब उनका मां ने कहा था कि जनता का विश्वास मत खोना। लोगों की मदद करने का जुनून ऐसा रहा कि कई दिनों तकघर नहीं जा पाते थे। 2015 में कुछ वोटों से पराजय मिली फिर भी हिम्मत नहीं हारी और एक समाजसेवी की तरह मानवता करते रहे, आज वहां की जनता इस समाजसेवी के हारने का अफसोस बयां करती है। समाजवाद की राजनिति करने वाले बब्लू यादव का सैफई घराने से जुड़ाव है। जिला पंचायत सदस्य रहते हुए अपने क्षेत्र में कई विकास कार्य जिसका होना वहां की जनता को असंभव लगता था। पर कहते है धुर्त राजनीति अक्सर अच्छे लोगों को धोखा दे देती है। अपने सरल स्वाभाव और विकास कार्य के भरोसे रहे बब्लू यादव को कुछ वोटों से पराजय हो गयी। बावजूद इसके उन्होंने मदद का दामन नहीं छोड़ा है। कोरोना काल में लोगों की मदद कर रहे है जिसे पनकी से गोरखपुर तक लोगों  सराह रहे है। श्री यादव अपनी मां और भाई को अपना आदर्श मानते है।

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