पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था स्टेज थ्री की तरफ बढ़ सकता है कोरोना!

कानपुर 14 मई। कोरोना से अर्थव्यवस्था पर जो असर पड़ा है कई राज्य और केन्द्र सरकार के पास इससे निपटने के क्या मास्टर प्लान वाकई है। कोरोना की दस्तक के बाद 22 मार्च को जनता कर्फ्यू उसके बाद से जारी लॉक डाउन सरकार की अधूरी तैयारी का उदाहरण है।मुझे लगता है कि अनय देशों में कोरोना ने जो कहर बरपाया,उसके बाद सरकार ने आगे का मास्टर प्लान बनाने से ज्यादा जरूरी लॉक डाउन लागू करना ठीक समझा। ये जानते हुए भी कि पूरे देश में लाखों कामगार अपने घरों से दूर रहते है। जिस अर्थव्यवस्था में हम जी रहे है उसमें गरीब और माध्यम वर्गीय परिवार टूट जायेंगे। सरकार की नीतियां उद्योगों और व्यपार के लिये व्यापारी वर्ग के अनुसार कभी ठीक नहीं रही क्योंकि सरकारी दफ तरों में फैला भ्रष्टाचार उसी तरह कायम है। पर इन सब से बेपरवाह सरकार ने लॉक डाउन के तीन चरणों को लागू कर दिया। अर्थव्यवस्था बिगड़ी तो बीस लाख करोड़ा का पैकेज देकर जख्मों पर हल्का मलहम लगाने का काम सरकार कर रही है। पर न जाने कितने लोगों की नौकरी चली गयी, लाखों मजदूर सड़क पर आ गये, कई जाने चली गयी। बड़ा सवाल है कि  आखिर क्यों कोरोना को लेकर सरकार ने मास्टर प्लान नहीं बनाया जिससे आम जनता को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। सरकार जानती थी कि लॉक डाउन से अर्थव्यव्स्था पटरी से उतरेगी, अगर यही करना था तो लॉक डाउन और थाली, ताली पीट
ने ड्रामा क्यों किया। लॉक डाउन में छूट सबसे पहले शराब बिक्री को दी गयी, अब पूरी तरह से दुकान, प्रष्ठिान, शोरूम, बाजार खुल रहे है जहां सोशल डिस्टेसिंग सिर्फ नाम भर की है। क्या अब कोरोना नहीं फैलेगा। दरअसल सच्चाई यही है कि कोरोना के खौफ के बीच सरकारों ने अपनी जिम्मेदारी से मुंह चुराया और सारा ठिकरा जनता पर फोड़ने की तैयारी है। ये ठीकरा वर्ग विशेष पर भी हो सकता है, लॉक डाउन का पालन न करने वाली जनता पर फूटेगा। यानी सरकार की नीतियों ने हमे कोरोना के स्टेज थ्री में लाकर खड़ा दिया है। और सरकार के पास कोई मास्टर प्लान नहीं हैे। अगर यही करना था तो पहले ही जनता को जिम्मेदारी का अहसास दिलाकर उन लाखों कामगारों को घर जाने के लिये कुछ दिन कि ट्रेन, बसों की व्यवस्था मुहैया करा देते तो कई जाने बच जाती। ये मेरे व्यक्तिगत विचार है, जिसमें जनता से ज्यादा सरकारों की लापरवाही सामने आ रही है।यानी जिस खौफ से हम 22 मार्च को रूबरू हुए थे वे उस खौफ का सामना करने का वक्त आ गया है। साभार बर्निंग न्यूज

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  1. बिलकुल सही कहा सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है और सारा ठीकरा जनता के सर फोड़ने को तय्यार है

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