फर्जी पत्रकार.. असली पत्रकार..ये कैसा चौथे स्तंभ का किरदार

आप सभी मित्रों को मेरा नमस्कार.. मै पहले तो बता दू के मै बहुत बड़ा वाला पत्रकार हूं.. उनके लिये जिनके काम मैने निस्वार्थ कर दिये। उनके लिये मुझसे बड़ा बेइमान नहीं जिनके काम करने के मैने दाम मांग लिये। क्योंकि वे अपने काम कराने के लिये पुलिस, अधिवक्ता, तहसीलदार, कानूनगो, या यूं कहे की इमानदारी की सबसे बड़ी पाठशाला कहे जाने वाले सरकारी विभाग में एड़िया घिस कर परेशान हो गये थे। अब आता हूं मुद्दे की बात पर जिनके काम मेरे इंट्री होने से बिगड़े है या जिन बड़े, या काबिल छोटे भाईयों के पेट पर लात पड़ी, उनकी नजर में मै फर्जी पत्रकार भी कहला सकता हूं। मेरे गुरू जी ने कहा था कि जब अपने ही अंदर झांकने का वक्त आये तो बुराई खुद से शुरू करना। इससे गाली देने वाले थोड़ा संयम बरतेंगे। दरअसल कई सालों से सोशल मीडिया पर सुनता आ रहा हूं कि फर्जी पत्रकारों पर कसेगा शिकंजा, दूसरी खबर भी पढ़ता है कि अब पत्रकारों का उत्पीड़न करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्यवाही.. अब इन दोनों खबरों पर विस्तार में अपना ज्ञान हौंकने जा रहा हूं। पहले आईये फर्जी और ब्लैकमेलर और समाजसेवी पत्रकारों की बात करते है। 
मै जानना चाहता हूं फर्जी पत्रकार कैसा होता है। यू टयूब चैनल वाला फर्जी है.. ऐसा ज्यादातर लोग कहते है, और सच्चाई यह है कि तेजी से डिजिटल की तरफ बढ़ रहे मीडिया सेक्टर में हर खबर इन्हीं पर चलती मिल जायेगी। बड़े बड़े चैनल, अखबार अब इस तरफ बढ़ रहे है। अब हर कोई गली कूचे में एक मेल आईडी से यूटयूब चैनल बनाकर आईडी माइक लेकर अवैध धंधे करने लगा है तो वह फर्जी है या अपराधी इसे खुद समझिे। 2 प्वाइंट है  ब्लैकमेलर पत्रकार.. यहां सवाल यह उठता है कि आॅनलाइन चैनल चलाने वाले ज्यादा ब्लैकमेलर हो सकते है, पर सच्चाई यह है कि ऊंचे सस्थानों से लेकर बड़े सेटेलाइट चैनल वाले भी ब्लैकमेलर है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके है। उस बिरादरी में हम भी आते है इसलिये कोई कॉलर ऊंचा करके ज्ञान हमे नहीं दे सकता है। कई ऐसे है जिन्हें संसथान से दस हजार का सैलरी नहीं मिलती है पर खर्चे किसी सरकारी अधिकारी से कम नहीं है। इसलिये भईया ब्लैकमेलर पत्रकार के शब्द पर विचार करना होगा। 3 कटेगरी है समाजसेवी पत्रकार
यह कौम सबसे ज्यादा तादात में अखबार, चैनल में पायी जाती है। दूसरों का भला करने के लिये धूप, संर्दी में अपना काम करते है, परिवार से परे दूसरों के लिये जी जान लगा देते है क्योंकि हम पत्रकार है ओर समाज के पैहरी है। पर इसके बदले कोई समाजसेवा के बदले कुछ दे दे तो भी लोग उसे वसूलीबाज कहते है मै इसकी कड़ी निंदा करता हूं। क्योंकि पत्रकार हमेशा शोषित ही होता रहा है। 
अब बड़ा सवाल कि पत्रकारों का शोषण करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही होगी
यहां बता दूं कि किसी अधिकारी पर कार्यवाही कभी नहीं हुई है और जल्दी होगी, क्योंकि जी हुजूरी भी हमी करते है और   सबसे ज्यादा बजाते भी उनकी हमी है। उनकी बोली बोलो तो अच्छे पत्रकार, नहीं बोलो तो फर्जी पत्रकार, जब संस्थान ही साथ नहीं देता तो कोई भी विभाग उत्पीड़न कर ही लेगा ऐसे में पत्रकारों की संस्था एक हद तक लड़ सकती है, पर वह भी यही देखगी पत्रकार की कैटगरी क्या है। उनके काम का है या नहीं, ऊंचा संस्थान है या नहीं वगैरह आदि। 
तो हे पत्रकार प्राणियों जो जैसा है चलता रहेगा बदलाव आयेगा पर आपके खुद के कर्म से आगे से कोई यूटयूब, कम दिखने वाले चैनल, या ऐसे अखबार जो कम दिखते और बिकते हो उनके पत्रकारों को कोई फर्जी, ब्लैकमेलर कहे तो मुंह मत बनाईये और खुल
कर सामने आईये.. जैसे कर्म होंगे वैसा फल मिलेगा... 
क्योंकि बाप बड़ा न भईया सबसे बड़ा रूप्पया... जिसके पास रूप्पया वही सबका बड़ा भईया...
वैसा लिखना और भी ज्यादा था पर कम शब्दों में इतना समझने और समझाने के लिये काफी है।
क्योंकि मीडिया की दुर्दशा के लिय जमीनी पत्रकार कम ऊंचे संस्थानों में बैठे ज्यादा जिम्मेदार है। आज भी किसी लड़की को काबलियत पर नहीं उसकी सुंदरता और समझौते के आधार पर नौकरी दी जाती है।
यहां एक बात सपस्ट कर दंू की अखबारों में कई क्रास इंटरव्यू के बाद नौकरी मिलती है.. पर टिकेगी कब तक ये कोई नहीं जानता, दूसरा चैनल में कृपा और सोर्स से मिलती है। मीडिया में काबलियत के कई पैमाने लागू कर दिये गये है जिसके बाद आॅन लाइन चैनलों की बाढ़ आयी है। आखिर अपना हुनर दिखाने का सबको हक होता है। 
जिसे गाली, या तारीफ करनी हो 9305120350 पर कर सकता हूं.. जल्द ही एक बड़े रैकेट का खुलासा भी करूंगा, बड़े संस्थान का कैसे शहर में करोड़ों की जमीन हथिया ली। 

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