राशन की दुकान पर खड़ी 13 साल की रश्मि सुबह पांच बजे पहुंच गयी थी। उसके जैसी कई लड़कियां और महिलायें भी सरकारी राशन लेने पहुंची थी। कोटेदार के आने के बाद प्रक्रिया शुरू होती है ओर करीब 11 बजे तक रश्मि को 8 किलो चावल और 12 किलो गेहूं मिल जाता है। वह खुशी से अपने माथे और चेहरे के पसीने को पोंछते हुए सर पर राशन रखकर निकल पड़ती थी घर के लिये.. जैसे ही घर पहुंचती है मां उसे पानी देती है.. पिता को घर में न देखकर मासूमियत से उस बेटी ने पूंछा मां पापा कहां है.. लॉक डाउन है ऐसे में कहां निकल गये। मां ने नजरे चुरायी और कहा पता नहीं। करीब एक घंटे बाद पिता शराब के नशे में घर पहुंचे तो मां बेटी दोनों हतप्रभ थी हो भी क्यों न सवा माह से काम धंधा बंद है , खाने के लाले पड़े है, किसी से उधार लेकर तो कभी सरकारी राशन से पेट की आग बुझायी जा रही है। पिता को शराब के नशे में देखकर पूछा तो पता चला कि सरकार ने शराब की दुकानें खोल दी है। बड़ी मेहनत से घंटों लाइ में लगने के बाद एक हाफ मिल पायी जिससे दो दोस्तों के साथ महिने भर की प्यास बुझी। मां बेटी की आंखों में आसंू थे, घर के बाहर खड़ी दूर दिख रहे मंदिर के ऊपर लगे भगवा झंडे को देखने लगी जो बता रहा था कि यहां भगवान का मंदिर है.. दूसरी तरफ मस्जिद की मिनारे दिख रही थी जहां अब इबादत नहीं होती, मां बेटी दोनों को बुझी आंखों से देखते है मानों सवाल कर रही हो.. गुरूदारा बंद, चर्च बंद मस्जिदों में नहीं होती इबादत, मंदिरों में नहीं सुनाई देती आरती. बंद हो गये शिवाला.. कोरोना से कैसे बचे जब खोल दिये मधुशाला...
आभार बर्निंग न्यूज का मेरे मन के भाव को प्रकट करने के लिये पठान...
आभार बर्निंग न्यूज का मेरे मन के भाव को प्रकट करने के लिये पठान...

Sarkar apna nuksan ki bharpai kr rhi bhai
ReplyDeleteदेश कोरोना संक्रमण के संकट व आतंकी हमलों की समस्या से गुजर रहा है।आज धार्मिक स्थल व शिक्षण संस्थाएं बंद है,सभी तरह के आयोजनों पर रोक है ऐसे में शराबियों को उत्सव मनाने की छूट देना अत्यंत शर्मनाक व निंदनीय है।हम नागरिकों को अत्यंत रोष व निराशा है।सरकार को इस पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए।
ReplyDeleteराजेन्द्र अवस्थी
सचिव
नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक इम्प्लॉइज,कानपुर