#shahidpathan,#कोरोना को किया ऐसे देंगे मात

कोरोना हारेगा.. भारत जितेगा.. ये स्लोगन सुनकर यकीनन दिल को सुकून मिलता है। इसी के साथ उन लोगों के चेहरे दिमाग में घूम जाते है जो परिवार को दूर छोड़ कर दो जून की रोटी कमाने बाहरी प्रदेश गये थे। कोरोना के चलते कईयों की नौकरी गयी तो कुछ वापस आ गये.. पर हजारों ऐसे थे जो फंसे ही रह गये। कुछ ने पैदल चलकर घर का रास्ता तय किया। वो मासूम लड़की की कहानी आज भी याद है 800 किमी का सफर तय करने के बाद भूखी प्यासी गांव की दहलीज पर पहुंच कर उसने मौत से हार मान ली। कोरोना से ज्यादा दहशत भूख, बेरोजगारी, की दिखी.. पर क्या हमारी सरकारे वाकई इतनी चिंतित है जितनी हमे चिंता है। हम भारत के नागरिक है सरकार से सवाल पूंछना हमारा हक है कि क्या सरकार का फैसला सिर्फ लाकडॉउन करने तक ही सही था? मै ये नहीं कहता कि लॉक डाउन का फैसला गलत था, यकीनन एक फैसले से इतनी बड़ी आबादी वाले हमारे देश अन्य देशों के मुकाबले तेजी से कोरोना को अभी तक मात देने में आगे रहा है। पर इसके पीछे की तस्वरी और ज्यादा भवायह है, बेरोजगारी, के साथ आर्थिक व्यवस्था इस कदर चरमरा गयी है जिसका खमियाजा सालों तक उठाना होगा। इसी बीच सरकार का लॉक डाउन खोलने का यह फैसला कितना सही है इसे हर कोई अपने चश्मे से देख रहा है। दरअसल इतनी दिनों की मेहनत के बाद पूरे भारत ने सरकार का साथ दिया पर लॉक डाउन मे मिली छूट ने कोरोना को घर घर तक पहुंचने का रास्ता दे दिया है। ये कभी न कभी तो होना ही था। क्योंकि लॉक डाउन सिर्फ एक उपाय है उपचार नहीं है। कोरोना को मात देने के लिये वैक्सीन और एहतियात काम आयेगी। बड़ा सवाल है मूर्ति में करोड़ों फेूकने, अमेरिका के राष्ट्रपति के आगमन और चुनाव प्रचार में करोड़ा खर्च के साथ मौजूदा और पूर्व की सरकारों ने क्यों नहीं मेडिकल व्यवस्थायें बढ़ायी। अगर हमारे पास भी संसाधन मजबूत होते तो आने वाले वक्त में हम और मजबूती से कोरोना से लड़ सकते है। पर सोशल मीडिया के माध्यम से कोरोना पर भी राजनीति होना तय है। जिसकी शुरूआत होने वाली है। 
साभार बर्निंग न्यूज... अभी तो ये अंगड़ाई है.. बाकी कोरोना से लड़ाई है..

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