बहन, बेटियों को नंगा देखने की ख्वाहिस करने वालों देखों अल्लाह का इंसाफ...

तुमने हमारी बहन, बेटियों के सर से आंचल खींचा.. उन्हें आजादी के सपने दिखाकर शरियत के खिलाफ भड़काया। पर देखों ने  अल्लाह का इंसाफ कितना आलामुकाम है। पूरी दुनियां में जहां भी अल्लाह की हिदायतों से हट कर इंसान ने जब जब कोई काम किया वहां अल्लाह का अजाब किसी न किसी शक्ल में आया है। आज कोरोना को लोग एक सिर्फ महामारी कह रहे है, लेकिन क्या वाकई ये सिर्फ एक महामारी है या अल्लाह का हिदायतों को न मानने वालों को एक नसीहत कि अभी भी सम्हल जाओ नहीं तो अंजाम इससे भी ज्यादा बुरा होगा। थोड़ा फ्लैश बैक में चलते है। दुनियां के कई देशों में बेहयाई के साथ मुस्लिम औरतों को आजादी देने के नाम पर उन्हें कम कपड़े पहनकर घूमते देखने वाले इस्लाम की कानूनों को गलत बताते रहे है। याद करिये सीरिया, यमन,अमेरिका, चीन जैसे देश जहां मुसलमानों को बेहयायी के सारे इंतजाम दिये जा रहे थे। क्या हुआ उन देशों में सबके सामने है। कश्मीर में जिस तरह से महिलाओं के साथ अभद्रता हुई, बहन बेटियों के चेहरे और सर से आंचल खींचे गये, उन्हें अलगावादी कहकर जुल्म किये गये, घरों में कैद रखा गया। ऐसा दुसरे समुदाय की महिलाओं के साथ भी हुआ जो सरासर गलत है। एनआरसी, सीएए जैसे कानून लाये जा रहे है, किसी को नागरिकता देना गलत नहीं पर जब खुद के खाने के लाले पड़े हो तो पहले खुद का पेट भरा जाता हैतब दूसरों को लाया जाता है। पर देखियें कुदरत का इंसाफ, जिस तरह से मुस्लिम बहन बेटियों को आजादी के नाम पर खुला घूमने की वकालत करने वाले आज खुद चेहरा ढक कर चल रहे है। जिन्होंने दूसरों को बुलेट के दम पर कैद किया  आज उन्हें ही पूरे देश को कैद करना मजबूरी हो गयी। दरअसल ये अल्लाह की हिदायत है कि इस दुनियां में उससे बड़ा कोई नहीं है। मुसलमानों के लिये भी ये एक हिदायत है कि वो अल्लाह के खौफ से ज्यादा ऐसे लोगों का खौफ खा रहे है जिनका खुद का अस्त्तिव उस खुदा के सामने एक जर्रा के बराबर भी नहीं। इसलिये खुद किसी के साथ गलत न करें, दूसरे समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचाये,महिलाओं का सम्मान भी करें। हम मुसलमान है इसके लिये डरना नहीं है बल्कि फर्क करिये.. पर उससे ज्यादा अल्लाह के खौफ से डरियें और दूसरों को तकलीफ न हो इसका ध्यान रखियें, क्योंकि इस्लाम का तकाजा दूसरों को खुशी देने का है, न की दुख देना का
साभार बर्निंग न्यूज

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