एक छोटे से गांव से शहर की दहलीज पर पहुंच कर आम आदमी से गैंगस्टर तक का सफर तय करने वाले बसपा नेता नरेन्द्र सिंह उर्फ पिंटू सेंगर की कहानी किसी फिल्म के उस नायक की तरह है जो लोगों का मसीहा बनने के चक्कर में खुद गुंडा बन गया। कानपुर में छात्र राजनीति से शुरू हुआ नरेन्द्र सिंह सेंगर का अपराधिक इतिहास कुछ ऐसा ही बताता है। मायावती को चॉद पर जमीन देने से सुर्खियों पर आये नरेन्द्र सिंह सेंगर के विरोधी भी उसी तादात में बढ़ते गये, जैसे जैसे उसका कद बढ़ता गया। शहर के सांसद, विधायक, पुलिस अधिकारी से लेकर शासन में बैठे बड़े अफसरों तक उसकी पैठ थी। 1992 में दंगे के दौरान उसका एक और रूप भी लोगों ने देखा था। धीरे धीरे जमीन के धंधे में उतरे नरेन्द्र सिंह ने खूब दौलत बटोरी पर अपने दोस्त खोता गया। वर्तमान में उसकी यह हालत थी कि वह अपने चालक को छोड़ कर किसी पर यकीन नहीं करता था।शनिवार को उसकी ताबड़तोड़ गोलियां मार कर हत्या किये जाने के बाद उसके हमदर्द भी सामने आये। शहर के कई विधायक, बाहूबली राजा भैय्या भी महाराजपुर के डयोडी घाट पर पहुंचे। भारी पुलिस बल समेत पीएसी भी लगायी थी। इधर पुलिस की आधा दर्जन टीमें इस हत्याकांड के खुलासे में लगी हुई है। खुद एसएसपी दिनेश कुमार पी टीम का नेतृत्व कर रहे है। सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरों में कई और फूटेज मिली है। बदमाश दो बाइक पर चार दिख रहे है पर पुलिस का आशंका है कि बदमाशों को लाइनअप इर्द गिर्द मौजूद रहा कोई पांचवा शख्स कर रहा होगा।क्योंकि पेशेवर बदमाशों ने हमला तभी किया जब टारगेट बिल्कुल निशाने पर आ गये। यानी की कोई पांचवा व्यक्ति था, जिसने नरेन्द्र के कार से उतरते ही उसकी पहचान करायी।
पुलिस के लिये नरेन्द्र का मोबाइल है अहम सुराग
बसपा नेता नरेन्द्र सिंह की हत्या के बाद कई ऐसे सवाल है जिनका जवाब पुलिस के लिये खोजना काफी मुशिकल है। इस पूरे हत्याकांड में खादी, खाकी के गठजोड़ के साथ सुपारी किलर की भूमिका जरूर सामने आयी अगर पुलिस ने इमानदारी से अपने काम किया। दरअसल सूत्र बताते है कि चकेरी में ही करोड़ों की जमीनों को लेकर बड़े लेविल मामले चल रहे थे जिसमें अधिवक्ताओं का रोल भी है। वहीं नरेन्द्र सिंह का मोबाइल अहम कड़ी हो सकता है, उसके फोन की सीडीआर और वायर रिकार्डिंग से हत्याकांड तक पहुंचने में पुलिस को सफलता मिलेगी। हत्याकांड में बदमाशों के कद काठी से एक बात तो तय है कि ये शार्प शूटर अपराध की दुनिया के पुराने माहिर है। प्रतापगढ़ से बनारस और कन्नौज तक इनके तार जुड़े हो सकते है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही हैै। जल्द ही इस घटना के खुलासे के उम्मीद जतायी जा रही है।
nice story shahid ji. so greatfull information in criminal activities. i think new ssp become solve this case. good luck your reporting.
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