चौबेपुर के बिकरू गांव से शुरू होकर सत्ता के गलियारों तक विकास दुबे की दहशत के जरिये खुद की तिजोरियां भरने और वोट बैंक की राजनीति ने बिकरू कांड को हवा दी। इसी शह पर विकास न सिर्फ एक बड़ा अपराधी बना बल्कि यूपी का माफिया बनने के ख्वाब देखने लगा था, एसटीएफ और एसआईटी की जांच में कई खुलासे होने बाकी है। फिलहाल एक खुलासा सामने आया है कि पूर्वाचंल के बाहूबली अतीक अहमद गैंग और गोरखपुर के तिवारी बंधु के संपर्क में विकास आया था। वहीं विकास की दहशत को बंदूक के दम पर भुनाने वाले उसके खास गुर्गे का जब एसटीएफ से आमना सामना हुआ तो इस बदमाशों की पैंट तक गीली हो गयी थी।
पिस्टल तनते ही निकल आयी थी विकास की पेशाब
पत्रकारिकता में कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, पर कुछ घटनायें ऐसी होती है जिनका जिक्र करना पड़ता है। ऐसा इसलिये की जिस विकास को सोशल मीडिया पर हीरो बनाया गया, जिसने बंदूक के दम पर न जाने कितनों पर सितम किये वह पुलिस से मुठभेड़ होते की ठीक से गोली भी नहीं चला सका, एसटीएफ ने जवाबी कार्यवाही की तो उसका पेशाब तक निकल आया था दहशत में, हैलट अस्पताल और घटनास्थल पर एसटीएफ के कुछ सिपाहियों की जुबानी ये बात सामने आयी। इससे एक बात तो साफ है कि जब बदमाश का पुलिस से सीधे आमना सामना होता है तो उसकी पैंट गीली ही हो जाती है।
अमर दुबे की भी हुई थी पैंट गीली
विकास के दम पर दूसरों की जमीन और गरीब की बेटी पर हक जताने वाला अमर यूं तो पूरे गांव में दहशत का दूसरा नाम था। विकास के बाद उसकी अपराध की दुनियां वह सम्हलाने वाला था, पर बिकरू गांव में सीओ समेत आठ पुलिस वालों पर ताबड़तोड़ फायरिंग करने वाले अमर का एसटीएफ का पहली गोली चलते ही पेशाब निकल आया था। पनकी में हुए मुठभेड़ में एक बड़े अधिकारी ेने इसका जिक्र करते हुए बताया कि एसटीएफ ने जब घेरा और ललकार कर सरेंडर करने को कहा तो अमर ने पहली गोली चलायी, दूसरी गोली एसटीएफ ने चलाई तो दहशत में अमर का पेशाब छूट गया था, कुछ देर बाद उसकी लाश पड़ी थी। जब उसे उठाकर अस्पताल ले जाया जा रहा था उसकी पूरी पैंट गीली थी।
सिस्टम का खेल, पुलिस, नेता बन गये विकास की रखैल
इसे खराब सिस्टम की देन ही कहेंगे की दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या करने वाले विकास की आर्थिक और दहशतगर्ती का विकास बढ़ता गया और कई नेता, विधायकों और लखनलऊ से लेकर कानपुर तक के अफसरों की शह पर वह देखते ही देखते करोड़पति और इतना बड़ा माफिया बन गया। यही वजह रही कि सत्ता के गलियारों से मिला आर्शीवाद और दिलेरी ने कई थानेदार, सिपाही, कई नेता और अफसरों को उसकी रखैल की तरह बना दिया था। किस अफसर, को कहां गिफ्ट देना है, किसी फ्लैट में किसे क्या सुविधायेंदी जाये ये जय बाजपेई के जरिये तय की जाती थी। जय बाजपेई सिर्फ एक खंजाची नहीं है बल्कि विकास का सबसे बड़ा राजदार भी है। बेहद करीबी सूत्र बताते है कि जिन नेताओं के साथ उसकी फोटो वायरल हुई है उनके बहुत से काम विकास ने कराये है, चुनाव में खर्चे से लेकर लड़कों की टीम और प्रचार प्रसार का काम भी विकास संभाल लेता था, यही वजह रही की पुलिस विभाग के अफसर भी उसके मददगार बने।
सिस्टम में हुए सुराख को भरने के लिये एसआईटी सिर्फ आठ पुलिस वालों की हत्या की जांच नहीं कर रही है बलिक विकास जैसे बदमाश को किसने पाला, किसने बचाया ये सब भी जांच का हिस्सा है। एसआईटी और एसटीएफ ने जो सीडीआर की कुंडली निकाली है उसमें कई नाम है। तीन उद्योगपतियों समेत चौबेपुर में मनोंरजन का बड़ा हब चलाने वाले मठाधीश भी विकास की चौखट तक जा चुके है। साबुन, पान मसाले के कारोबारी भी संपर्क में थे। एसआईटी की जांच में उन सभी का जिक्र सामने आयेगा जो उसके मददगार थे, उन सभी को जांच के घेरे में रखा जायेगा। फिलहाल कहा जाये कि सिस्टम के सुराख ने विकास जैसे कइ्र लोगों को पनाह दी है उसे भरने के लिये सीएम ने सीधे शुरूआम की है।
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