किडनैपिंग, फिरौती और पुलिस की जुमलेबाजी

इन दिनों कानपुर पुलिस सुर्खियों में है। या यूं कहे कि किसी के लिये हीरों तो किसी के लिये जीरों है। बिकरू कांड में जिस तरह से ताबड़तोड़ कार्यवाही की गयी वह साफ संदेश देती है कि पुलिस पर हाथ डालने वाले बख्से नहीं जायेंगे, पर गरीब आदमी के साथ बदमाश कुछ भी कर ले पुलिस अपने पुराने ढर्रे पर ही काम करेंगी। अब देखियें शहर में अपहरण की एक से एक वारदात हो चुकी है, पुलिस ने पुराने मामलों से कभी कोई सबक नहीं लिया। परिजनों के बयान को माने तो पुलिस की चूक इतनी बड़ी है कि उसकी कीमत सच में अपहरण हुआ है तो इस परिवार को चुकानी पड़ेगी। पहले आपको बता देते है मामला क्या हैै। 
ये है मामला
बर्रा निवासी चमन सिंह का बेटा संदीप 22 जून से लापता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का बर्रा निवासी राहुल यादव से रिश्ता तय हुआ था। इस बीच उन्हें जानकारी हुई कि युवक अच्छी प्रवृत्ति का नहीं है तो उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया। आरोप है कि इसके बाद से युवक फोन पर परिवार को धमकी देने लगा था। 22 जून को उनका बेटा संदीप पैथोलॉजी गया था, जिसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा। इसपर थाना पुलिस से शिकायत करके राहुल पर बेटे के अपहरण का संदेह जताकर मुकदमा दर्ज कराया था। 
पुलिस की स्मार्टनेस देखियें
परिजनों ने एसएसपी दफ्तर में धरना देकर उसके अनुसार बेटी के जेपर और मकान बेंच कर बेटे की जान बचाने के लिये पुलिस के सामने बैग में तीस लाख रखकर दिये। गुजैनी पुल पर पैसा लेकर बदमाशों ने बुलाया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें शंका थी कि बदमाश पैसा लें लेंगे पर बेटे को नहीं छोडेंगें उनकी आशंका सही साबित हो रही है।
पूर्व में हुई कई घटनायें
कानपुर में ऐसी कई अपहरण की घटनायें सामने आ चुकी है जब फिरौती लेने के बाद भी अपहरर्त की हत्या कर दी गयी। इस मामले में बर्रा इंस्पेक्टर के बेतुके बोल भी सामने आ रहे है चर्चा है कि इंस्पेक्टर कह रहें ज्यादा से ज्यादा सस्पेंड या ट्रान्सफर होगा। 
बोली एसपी साउथ
एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता ने इस मामले में बताया कि पुलिस तेजी से क्लू  एकत्र कर रही है, कई अहम सुराग मिले है। परिजनों ने पैसा बैग में रखने और फेंकने की बात कही है जो निराधार है। अब मैडम को कौन बताये कि वे अफसर है और थानास्तर पर क्या क्या होता है। अगर इस मामले में युवक के साथ कोई अप्रिय घटना हो गयी तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। 
कहीं कोई और खेल तो नहीं
पुलिस कई दिनों से सर्विलांस के सहारे इस घटनाक्रम को खोलने में लगी है पर कोई बदमाश हाथ नहीं लग रहा है। आशंका यह भी है कहीं युवक ने खुद अपने अपहरण की कहानी तो नहीं रची, पर सवाल उठता है वह ऐसा क्यों करेगा, फिलहाल बर्रा पुलिस की नाकामी किसी परिवार के चिराग पर भारी पड़ती दिख रही हैै। यानी के अगले दो दिन में अगर युवक का कुछ पता नहीं चला तो किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। 
वहीं सवाल उठता है कि अगर परिजनों ने बैग में पैसा रखकर दिया तो बदमाशों ने युवक को क्यों नहीं छोड़ा, अगर पुलिस के अनुसारबैग में पैसा ही नहीं था तो पुलिस ने ये रिस्क क्यों लिया क्योंकि इससे बदमाश बौखलाहट में कुछ भी कर सकते हैे।
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