एक चुटकी सिंदूर ने पहुंचाया सलाखों के पीछे, है रे खुसी

एक अपराधी के एक चुटकी सिंदूर ने खुशी की खुशियों को ग्रहण लगा दिया। जेल की सलाखों में उस गुनाह की सजा काट रही है जो उस पर जबरदस्ती थोपा गया। पुलिस उसे गुनाहगार साबित करने के लिये जी जान से जुटी हैै। पर पुलिस की कार्यवाही से अब ग्रामीण क्षेत्र समेत आम आदमी के मन में पुलिस के बदलापुर के लिये आक्रोश पनप रहा है। हम किसी भी अपराधी या उसके परिवार की पैरवी नहीं करते है, पर क्या वाकई पुलिस ने जिन दो लोगों को गुनाहगार बनाया है वे इस गुनाह में शरीक है।
खुशी की खुशियों पर अपराधी का ग्रहण
रतनपुर पनकी में रहने वाली खुशी बिकरू के विकास दुबे को मामा कहती थी, जाहिर है विकास की दबंगई का भौकाल से सभी प्रभावित थे। खुद पुलिस वाले उससे डरते थे, तो खुशी और उसका परिवार क्या चीज है। पुलिस का कहना है कि दो जुलाई की रात जब पुलिस पर गोलियां चलायी गयी तो अमर दुबे की पत्नी चिल्ला चिल्ला कर रह रही थी मारों, इन्हें ये यहां छूपे, क्या वाकई खुशी ने ऐसा किया।  गोलियों के बीच जब चौबेपुर एसओ और अन्य अपनी जान बचाकर भाग रहे थे ऐसे में किसने खुशी को ये कहते सुना इसका जवाब पुलिस के अफसर गोलमोल दे गये। 
एक चुटकी सिंदूर की कीमत सलाखें
अमर दुबे से खुशी की शादी 29 जून को हुई थी,मात्र दिन में वह ससुराल में रही, पांचवे दिन वह विधवा हो गयी। उसे क्या पता था कि अमर ने जो एक चुटकी सिंदूर उसकी मांग में भरा है वह खुशियां नहीं उसके लिये जिन्दगी भर का दर्द और दाग दे जायेगा, उसे इस सिंदूर की कीमत इस तरह चुकानी पड़ेगी। 
अपराधी पैरवी नहीं... पर क्या खुशी के साथ सही हुआ
अपनी ही शादी में ठुमके लगा रही खुशी और दो कदम की दूरी पर खड़े अमर दुबे की वीड़ियो देखकर पुलिस मान रही है कि खुशी की शादी उसकी मर्जी हुई थी। पर परिजनों ने कहा कि विकास के खौफ में बेटी की शादी अमर से की थी, गरीबी और पैसा विकास का लग रहा था सो गरीब परिवार मना भी नहीं कर पाया। सवाल सीधा है जब पुलिस के सामने राहुल तिवारी को पीटा गया, एसओ की इतनी हिम्मत नहीं हुई की वह विकास का कुछ कर पाये तो खुशी और उसके गरीब परिवार की क्या औकात हो सकती है। अगर खुशी अपनी शादी में डांस कर रही है तो क्या उससे उसका गुनाह साबित होता है। 
पुलिस को नहीं दिखे मुकदमें तो दुल्हन क्या जाने हकीकत
अमर दुबे एक अपराधी था और विकास का खास साथी था, ये बात पुलिस भी जानती थी पर कभी पुलिस ने उस पर हाथ डाल नहीं। पुलिस कहती है खुशी और उसके परिवार को पता था कि अमर अपराधी है, जब पुलिस इतना डरती थी तो गरीब परिवार कैसे इस शादी के लिये मना कर सकता था, और कौन दुल्हन होगी जो अपनी शादी में उदास दिखती है।
माता, पिता बोले पुलिस करे रहम
,खुशी के जेल जाने के बाद रहम की भीख मांग रहे खुशी के माता पिता ने कहा कि विकास का खौफ बहुत है ऐसे में शादी जबरन हुई या राजीखुशी इस बात का क्या मतलब है ये खुद पुलिस जानती है, उनका परिवार गरीब है पुलिस उन पर रहम करें, सिर्फ तीन दिन बेटी पति के साथ रही, डांस करने का खुशी को शौक था, अगर वह अपनी शादी में डांस कर रही है तो क्या वह गुनाहगार हो गयी। उनकी बेटी पुलिस को देखकर ही खौफजदा हो जाती थी ऐसे में गोलियों के बीच वह किसी का क्या साथ देगी, ये अफसर जानते है बस पुलिस उन पर रहम कर दें।

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