अरे भईया रूको... भाई कहां जा रहे हो, कहां से आ रहे हो... अरे सर जाने दो संडे है घूमने निकले है... देख भईयां हम तो छोड़ देंगे सिर्फ सौ रूपये लेकर पर कोरोना नहीं छोड़ेगा... एक बार पकड़ लिया तो अम्मा, बप्पा, और ये दोस्त और मोहल्ले वाले भी कहींघमने नहीं जा पायेंगे... इसलिये घर में रहो मास्क पहनो... जितने दिन के लिये सरकार लॉकडाउन करे है तब तक समझे... लाओ सौ रूपये का योगदान कोरोना देवी के नाम पर देओ..... कुठ इस तरत का ज्ञान आज कल शहर पुलिस लॉक डाउन तोड़ने वालों को दे कर समझा रही है पर लोग है कि मानने को तैयार नहीं है। शहर में रविवार को पुलिस विभाग ने चेकिंग अभियान चलाया था। कई ऐसे युवक, युवतियां थी जो बेवजह संडे मनाने निक ले थे। जानते थे कि सरकार ने पाबंदी कर रखी है , ताकि लोग सुरक्षित रहे पर शहर के लोग कहां मानने वाले। एक साहब तो लइकियां बैठाये गंगा बैराज पहुंच गये। पुलिस ने रोका तो बताने लगे दिक्कत, कहिन, रिश्तेदार के यहां जा रहे है देखने वो बीमार है। .... अब गंगा बैराज पर कौन सा रिश्तेदार रहता है, सो पुलिस कहां मानने वाली, इतने सवाल दागे कि रिश्तेदार को भूल गये, प्यार से कहने लगे सर चालान काट दीजिये,.. पर पुलिस ने मानवता दिखायी सिर्फ सौ रूपये के दो चालान काट दिये... एक लईका के और दूजे लईकियां के, वहां से वापस भैज दोउ...हमने पुलिस वालों के पास जाकर कहा कि न कागज चेकिंग न डीएल सीधे जुर्माना, बोले कोरोना देवी के नाम पर योगदान है.. लाओ आपका भी कर दे हम कहिन भईया पत्रकार है... तो बोलिन की का पत्रकारन का कोरोना न हुईया का हम हुई सकत है तो बोले पत्रकार महोदय जरूरी न हो तो घर पर रहियें, काहे जान जोखिम में डाल रहे हो, घर से निकलों तो सीधे आफिस चले जाओं, दिक्कत को समझों.. हमने दिक्कत को समझा और पुलिस के कहने का मर्म भी कि दूसरों का चालान करने वाली पुलिस खुद सुरक्षित नहीं है, कोरोना से डर तो सबको लगता है.. तभी दरोगा जी फिर बोले हम तो छोड़ देते है.. पर कोरोना नहीं छोैडेगा।
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