बेहया राजनीति ने बनाया विकास को गैंगस्टर पंडित

विकास दुबे का साथ गद्दार एसओ चौबेपुर विनय तिवारी ने दिया। मारे आठ पुलिसकर्मी गये। बड़ा सवाल उठता है कि क्या इस पूरी घटना के लिये सिर्फ पुलिस ही दोषी है। अभी तक की जांच और विकास से जुड़े कुछ मामलों की ग्राण्उड जीरो लेविल से जो जानकारी एकत्र की उससे एक बात तो साफ हो गयी कि यूपी के भ्रष्ट  नौकरशाह उस रखैल की तरह है जो पैसों के लिये कहीं भी नाच सकती है। इसमे उनका दोष ही नहीं, असल गुनाहगार तो वह खादी वाले है जिन्होंने विकास जैसे अपराधी को पाला है। 
पहली हत्या के बाद ही आया नेता का सर पर हाथ
विकास दुबे ने जब पहली बार हत्या की और उसका वर्चस्व क्षेत्र में बढ़ा तो ब्राहम्ण वोटों के लिये उसके गुरू हरकिशन श्रीवास्तव ने उस पर हाथ रखा था, उस समय उनकी यूपी में तूती बोलती थी। बस यहीं से शुरू हुई विकास के अपराध की बड़ी दुनिया, रंगदारी, जमीनों पर कब्जा और चौबेपुर को इडस्ट्रीयल हब बनाने में विकास का योगदान रहा। 
दूसरी हत्या थाने में दर्जा प्राप्त मंंत्री करने के बाद विकास का बच कर आना पुलिस के लिये ठीक वैसा था जैसे सैकड़ों लोगों के सामने पुलिस को नंगा कर देना। 
इसलिये पुलिस नहीं डालती थी हाथ
90 के दशक में जब विकास दुबे को कल्याणपुर पुलिस ने पकड़ा तो उसके लिये वर्तमान में एक विधायक और एक अन्य ने धरना दिया था। तब पुलिस को मजबूरी में हल्की धाराओं में कार्यवाही करनी पड़ी थी और पांच दिन में वह छूट कर घर आ गया था। 
उसके बाद उसने नेताओं का संरक्षण प्राप्त कर राजनीति में कदम रखा, उसकी पकड़ शहर के प्रशासनिक अफसरों से लेकर कस्बे के लेखपाल तक से थे, ऐसे में पुलिस बेचारी क्या करती, हाथ नहीं रखती तो नेताओं का डर
रख दिया तो जनता की नजर में बेमान, तो ऐसे में बेईमानी का तमगा ज्यादा बेहतर क्योंकि इस तमंगे में पैसा भी था। 
पकड़े गये जय बाजपेई ने जो खुलासे किये है वो इतने चौकाने वाले है कि अगर उसका सच सामने आ जाये तो कई माननीय बड़े कारोबारी नंगे हो जायेंगे। मतलब करोड़ों की डील से लेकर अपराध करके भी गुड फील कराने में विकास का इन लोगों को भरपूर साथ मिला है। 
साभार बर्निंग न्यूज

Comments