जब लगाई प्रभु से गुहार...छोड़ चुका था वो संसार@कानपुर पुलिस पर सिंघम बनने का है भूत सवार

हे प्रभू हम आपकी शरण में आये है मेरे में बेटे को बचा लो.. ये गुहार उस मां और बहन की थी जिसका भाई दस दिन बीस दिन से गायब था। ऊपर वाले प्रभु के दरबार में हर रोज प्रार्थना करती रहीं... पर कानपुर की जमीं पर एक अफसर भी थे जो इनके लिये किसी प्रभु से कम नहीं थे, जिन्हें हम कानपुर शहर का एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु के नाम से जानते है। पर ये क्या.. प्रभु की शरण में आने के बाद न बेटा मिला न फिरौती का पैसा। ये दर्द उस मां, पिता और उस बहन का है  जो दस दिन बाद ये सोंच सोंच कर बिलखेगी कि अब किसे राखी बाधेंगी। क्योंकि पैसों के लालच में भाई के दोस्त ही कातिल बन गये। पर कानपुर की आधुनिक और बदमाशों पर कहर बनकर टूटने का दम भरने वाले पुलिस 30 दिन बाद भी एक बहन के भाई को न खोज पायी न जिंदा न मुर्दा, फिलहाल पुलिस की जुमलेबाजी जारी है। 
22 जून का अपहरण 26 जून को कत्ल
22 जून को बर्रा निवासी चमनलाल के बेटे संजीत का अपहरण करने के बाद बदमाशों ने 26 जून को उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। उसके कत्ल में ज्ञानेन्द्र, कुलदीप, रामजी शुक्ला, नीलू सिंह और प्रीति सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। पर पुलिस पुराने मामलों से सबक लेना भूल गयी। दस साल पूर्व करन महेश्वारी का कत्ल कुछ इसी तरह हुआ था, बैंक मैनेजर के बेटे शिवम उर्फ गोलू का कत्ल भी ऐसे ही हुआ था। पुलिस की डायरी में ऐसे केसेज दर्ज है जिनसे पुलिस सबक ले सकती थी पर पुलिस तो सिंघम ठहरी, काम तो अपने तरीके से ही करेगी।
परिजनों का दर्द पुलिस ने नहीं सुनी फरियाद
चमनलाल, बहन रूची का रो रो कर बुरा हाल, नेता इसे जंगलराज की संज्ञा दे रहे है। राजनीति भी हो रही है, आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इन सब के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड कर दिया, सीओ मनोज यादव को सस्पेंड कर दिया। दोनों की लापरवाही सामने आयी। परिजन एक ही बात कहते रहे कि एसएसपी इमानदार तेज तर्रार है, उनसे उम्मीद थी पर उन्होंने उतना ध्यान नहीं दिया। यानी की प्रभु की शरण में आने के बाद भी बेटा न जिंदा मिला न अब तक मुर्दा, तलाश जारी है पर जिंदा संजीत की नहीं मुर्दा संजीत की जिसकी लाश कातिलों को सजा दिलाने के लिये जरूरी है। 
बड़बोलापन बना मौत का कारण
कातिलों ने बेबाकी से बताया कि संजीत अक्सर कहता था कि उसके यहां कारें, ट्रैक्टर और धन बहुत है, यहीं से दोस्तों के बीच लालच, धोखे की दांस्ता शुरू हुई। ज्ञान्नेद्र के साथ मिलकर कुलदीप, रामजी शुक्ला ने अपहरण की कहानी लिख डाली, दो किलोमीटर की दूर पर बंधक संजीत अपनों से मिलने के लिये तड़पता रहा पर उसे मौत मिली। और परिवार के लोग उसे न जाने कहां कहां ढूढते रहे।
पुलिस पर सिंघम बनने का भूत सवार
आपको बता कि इस समय शहर पुलिस पर सिघम बनने का भूत सवार है, किसी को भी पीट देना, गाली दे देना, आदत में शुमार है। बिकरू कांड के बाद जिस तरह से मुठभेड़ हुई उसके बाद शहर पुलिस खुद को सिघंम समझने लगी है पर बदमाशों ने उनकी हवा निकाल दी है। संजीत का अपहरण,हत्या सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि तेज तर्रार पुलिस के सिस्टम पर तमाचा है जो सर्विंलांस के दम पर बड़ी बड़ी बाते करती है। पर हम तो सिर्फ इतना कहेंगे प्रभु आप कुछ करिये, सिंघम बनने का भूत पुलिस से उतार दीजिये, नहीं तो ऐसी घटनाओं से खाकी को लोग निकम्मा कहने लगेंगे, जैसा की नेता कहने लगे है। अब संजीत वापस नहीं आ सकता मै ये भी नहीं कहता कि चार दिन में पुलिस क्या कर सकती थी पर ये जरूर कहूंगा कि अगर समय रहते बदमाश पकड़ लेते तो एक मां, बहन, पिता को अपने बेटे की आखरी बार सूरत देखने को मिल जाती जो अब संभव नहीं क्योंकि नदी में फेंका गया शव कब मिलेगा नहीं पता और मिल गया तो क्या पहचान में आयेगा।

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