यूपी पुलिस सदैव आपकी सेवा में तत्पर... ये स्लोगन अक्सर आपने अपने शहर, गांव में देखा होगा। वाकई यूपी पुलिस सेवा में तत्पर रहती भी है। कुछ उपवादों को छोड़ दे कि कानून व्यवस्था से लेकर घायल व्यक्ति की मदद और नाली से लेकर ननद भौजाई के झगड़े निपटाने वाली पुलिस ही है जिसने बीहड़ से लेकर कई माफियाओं को अंत कर समाज को बेहतर अहसास देती है। एक जमाने में छोटे से झगउÞे लेकर चोरी, डकैती, लूट, अवैध धंधों और यहां तक की डकैतों पर डाका डालने वाली पुलिस मुखबीरों के भरोसे रहती थी। वक्त बदला, पुलिसिंग बदली और बदल गया काम करने का तरीका अब मुखबीर सफेदपोश तो कोई व्यपारी बन गये तो पुलिस भी सबका हाथ, मेरा साथ की तर्ज पर आ गयी। पर आज आपको बतायेंगे पुलिस के एक ऐसे मुखबीर के बारे में जो दिखता नहीं है पर काम पूरे साल 24 घंटे करता है। इस मुखबीर ने कई अपराधी पकड़वाये, श्रीप्रकाश शुक्ला से लेकर मुन्ना बजरंगी, अतीक अहमद समेत यूपी के कई माफियाओं को इस मुखबीर ने पुलिस के हाथ धूल चटवा दी।
थोड़ा फ्लैशबैक में चलते है
तकरीबन सन 90 से लेकर 2003 तक यूपी में खास कर कानपुर में मुखबीरों की बड़ी इज्जत होती थी। थाने में थानेदार से ज्यादा मुखबीर का बोलबाला होता था, कहां क्या हुआ ये पुलिस को बाद में मुखबीर को पता चलता था। विक्रम मल्लाह हो, या फूलनदेवी, या फिर ठोकियां गैंग इन सभी का सफाया करने में मुखबीर बहुत काम आये। यही वजह रही कि बदमाशों ने सबसे पहले मुखबिरों का विकेट गिराना शुरू कर दिया। जिसके बाद जीवत मुखबीरी पर लगाम लगने लगी।
90 के दशक में हुई एक इलेक्ट्रानिक मुखबिर की शुरूआत
आप सोंच रहें होंगे ऐसा कौन सा मुखबीर है जिसके बारे में मै बताने जा रहा हूं, दरअसल अक्सर आपने अखबारों, पुलिस और टीवी चैनलों में सुना होगा, सर्विलांस के जरिये.. जी हा यही है यूपी पुलिस का वह मुखबीर.. जिसे पुलिस वाले सर्विंलास सिस्टम कहते है। पलक झपकते ही लोकेशन से लेकर बातचीत और यहां तक की किससे कितनी कहां बात हुई सब बताने वाले इस मुखबीर की यूपी पुलिस कायल है।
श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर करने में काम आया था सबसे पहले ई मुखबीर
90 के दशक में आतंक का पर्याय बने श्रीप्रकाश शुक्ला ने यूपी पुलिस की नाक में दम कर दिया था। तक एसटीएफ का गठन हुआ, उस समय के एसएसपी अजय सिंह की बदौलत एक नये मुखबीर तंत्र की शुरूआत हुई थी। तक आधुनिकता कम थी, पर अब आधुनिकता ज्यादा हैे। यही वजह है कि पुलिस का यह मुखबीर पहले से ज्यादा बेहतर काम करता है।
सर्विलांस सिस्टम को चलाने वाले कम्प्यूटर, इंटरनेट सर्फिंग के साथ ई रिकार्डिंग के माहिर होते है। पुलिस विभाग को इसके लिये परमीशन के बाद सेटअप मिलता है। कई पुलिस कर्मी दिन रात सर्विंलास के जरिये अपराधी से लेकर दंगे फसाद यहां तक की मोबाइल चोरी और लूट की घटनाओं की भी मुखबरी कर देता है। अब तक कानपुर में सर्विलांस के जरिये हजारों मामले साल्व हो चुके है। किस मोबाइल से कितनी बात की गयी किन नम्बरों पर बात की गयी, यहां तक की कौन सा मोबाइल बदमाश इस्तेमाल कर रहे ये भी औश्र जरूरत पड़ने पर गूगल मैप से ट्रैकिंग तक की जा सकती है।
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