कहानी बिल्कुल फिल्मी है। यूपी की तेज तर्रार पुलिस, सैकड़ों पुलिस वाले, बेहतरीन सर्विलांस टीम, 6 दिन से भूखे प्यासे, बारिश से भीगते हुए यूपी के मोस्ट वांटेड पांच लाख के इनामी विकास दुबे एंड कम्पनी को पकड़ने के लिये जी जान से जुटे थे। सीओ देवेन्द्र मिश्र, एसओ शिवराजपुर, चौकी इंचार्ज कुलदीप सिंह, नेबू लाल, चार सिपाही की हत्या करने वाले विकास दुबे को राजनीतिज्ञ संरक्षण मिला था ये तो सभी जानते थे। शहीद हुए पुलिस वालों की आत्मा को शांति भी उस वक्त जरूर मिली होगी जब एक के बाद एक विकास के पांच साथियों को मुठभेड़ में एसटीएफ ने मार गिराया, अब उनकी आत्मा और परिवार के लोगों को सिर्फ विकास की लाश देखनी थी। लेकिन ये क्या हुआ.. अचानक सब कुछ बदल गया। फरीदाबाद में देखा गया विकास दुबे अपने साथियों के साथ उज्जैन तक पहुंच गया। यूपी एसटीएफ हाथ मलती रह गयी। पर क्या वाकई विकास की गिरफ्तारी एक संयोग है या पूरी पटकथा दिल्ली या लखनऊ में लिखी गयी। हालाकिं विकास को जिंदा रखकर उसके मददगारों की मांग नेता कर रहे है, ये वो नेता है जिनकी पार्टी में कई दागदार मंत्री, विधायक हैे। सपा की ऐ नेत्री ने भाजपा पर सवाल उठा दिया फेसबुक पर कि सीएम पर 60 अपराधिक मुकदमें दर्ज है, जब प्रदेश का सीएम अपराधिक छवि का है तो विकास जैसे बदमाश ऐसी घटनाओं को अंजाम देंगे। खैर ये बात राजनीति की हुई। यहां हम बात यूपी पुलिस की कर रहे है। सवाल सीधा सा है वो कौन लोग है जिन्होंने इतनी बड़ी घटना क बाद भी विकास के सरेंडर कथित तौर पर होने की इबारत लिख दी।
नहीं दिखा विकास के चेहरे पर मौत का खौफ
वीड़ियो में कहीं देखने पर नहीं लगा कि विकास पुलिस से डरा हुआ है। उसे अपनी मौत का खौफ जरा भी नहीं लग रहा है क्योंकि उसे यकीन है उसके आकाओं ने उसे बचाने के लिये सब कुछ कर डाला, अब पुलिस या एसटीएफ कोर्ट में खुद को नहीं फंसा सकती है। पर विकास दुबे की इस तरह से गिरफ्तारी से आठ पुलिस वालों के परिवारों की बेचैनी बढ़ा दी है।
एसटीएफ पर टिकी आस
विकास यादव क्या जिंदा यूपी आयेगा?ये सवाल आठ पुलिस वालों के परिवार वाले उठा रहे है औश्र आम जनता भी कि विकास के साथियों को मार गिराने वाले पुलिस ने मुठभेड़ की जो पटकथा लिखी है क्या वह विकास के लिये लिखी जायेगी। दरअसल विकास को लेकर पूरे प्रदेश समेत देश में हड़कम्प मचा हुआ है। विकास को पुलिस खुद प्रोटेक्शन देगी क्योंकि कानून में गुनाहगारों के लिये भी तमाम गुंजाइस है। ओर जिस तरह से सरेंडर का नाटक हुआ है कानून के हाथ भी बंधे है।
पुलिस पर गोली चला दी, पुलिस को चलाने से पहले सोचना होता है दस बार
विकास दुबे ने आठ पुलिस हत्या की है, उसके साथ उसने और उसके साथियों ने सैकड़ों गोलियां चलायी, जिसमें कई घायल भी हुइ। लेकिन ऐसे अपराधी पुलिस पर गोली चलाने से नहीं चुकते और पुलिस को गोली चलाने के लिये तमाम कानूनी कार्यवाही करनी होती है। अब विकास के पकड़े जाने के बाद क्या विकास को ढेर किया जायेगा, शायद नहीं क्योंकि विकास को मारने का मतलब है कोर्ट में हर उस शख्स को जवाब देना जो इस फर्द में शामिल होगा।
ऐसे तो उठ जायेगा खाकी, खादी से विश्वास
विकास दुबे इस तरह पकड़ा जायेगा किसी ने नहीं सोंचा था, पर वह सरेंडर करेगा ये सब जानते थे। खास कर यूपी पुलिस, एडीजी एलओ प्रशांत कुमार ने कहा कि पुलिस पूरे देश की एक ही है, तो ऐसा क्यों हुआ कि उज्जैन में विकास कार से घुस गया और वहां की पुलिस सोती रही। इसका जवाब किसी के पास नहीं हैे। विकास का चेहरा देखकर नहीं लग रहा था कि वह पकड़ा गया। उसे यकीन है खाकी और खादी वाले उसे बचा लेंगे।
राजनीति, अपराध, पैसा के काकटेल में पनपते है विकास जैसे बदमाश
राजनीति में अपराध के लिये कोई जगह नहीं है, ये संविधान कहता है और संविधान में ही अपराधियों को चुनाव तक लड़ने की इजाजत भी है। पैसा, राजनीति, और गेंगस्टर का कॉकटेल हमेशा निर्दोषों की जान पर भारी पड़ा है। विकास दुबे के गैंग को भले ही पुलिस ने पूरी तरह तोड़ दिया हो पर हकीकत यह है कि अगर विकास जिंदा रहा तो वह जेल से पूरा गैंग न सिर्फ चलायेगा बल्कि जुर्म की दुनियां का सबसे बड़ा डॉन कहलायेगा। पुलिस भी यह बात जानती है। पुलिस केइमानदार अफसर खुद कहते है बेहतर समाज के लिये विकास और उसके द्वारा की गयी घटना नये उम्र के युवकों को अपराध की तरफ आकर्षिक करेगी जो अच्छे समाज के लिये ठीक नहीं है। पर कानून ने उनके हाथ बांध रखे है।
मै तो यहीं कहूगा जब अपराधी कोई कानून नहीं मानते तो पुलिस कानून तोड़कर भी बहुत कुछ कर सकती है जैसा इस मामले में करती आ रही है। यूपी के सीएम सख्त है और उन्होंने अपराधियों की कमर तोड़ने में छूट दे रखी है पर इस पटकथा में विकास ने उनके वजूद को चुनौती दी हैे।
योगी जी की साख पर बट्टा दूध के धुले नही अन्य पार्टी
विकास दुबे ने 2001 में जब राज्यमंत्री की हत्या की तो bjp की सरकार थी ये वह वक़्त थ जब उसे बड़ा गुंडा बनने की राह खाखी की कमजोर पैरवी ने दिखाई फिर कई सरकार आयी गयी पर उस पर हाथ किसी ने नही डाला।
विकास ने किया 1700 kmi का सफर
विकास दुबे ने हत्या के बाद शवली से लेकर उज्जैन तक करीब 1700 km का सफर तय किया 4 राज्य
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