कानपुर नगर में आपरेशन लंगड़ा चलाकर अपराधियों में खौफ पैदा करने वाले एसएसपी अनंत देव की पुलिसियां खौफ के सामने गैंगस्टर विकास दुबे और उसकी टीम 18 की दबंगई ज्यादा भारी पड़ थी। बिकरू कांड सामने आने के बाद परत दर परत खुल रही है तो पता चला कि आईजी रेंज मोहित अग्रवाल के पदभार ग्रहण करने के बाद पूरे जोन में अपराधियों की टॉप टेन सूची बनाकर उनकी होर्डिंग लगायी गयी। एक होर्डिग्ंग चौबेपुर थाने में भी बनायी गयी जिसमें विकास दुबे की हिस्ट्रीशीट 58 नम्बर और टॉप टेन में प्रथम पर थी। पर इस होर्डिंग को बनाने के बाद चौबेपुर पुलिस ने उसकी फोटो खंीच कर अफसरों को भेज दी उसके बाद होर्डिंग को थाने की कोठरी में रख दिया गया। अब मामला सामने आया तो यह होर्डिंग भी सामने आयी है जिसे लेकर अफसर गोलमोल जवाब देते रहे।
अब बात करते है डीआईजी अनंत देव कि
बतौर एसएसपी कमान संभालने वाले अनंत देव यहीं पर डीआईजी प्रमोद हुए, जब वे डीआईजी बने तब तक शहर में 61 अपराधियों को आपरेशन लंगड़ा के तहत शहर के तेज तर्रार थानेदारों ने पैर में गोली मार कर लंगड़ा कर दिया था। कई अपराधी शहर छोड़ गये तो कई खुद जेल चले गये, पर एक दर्दुनंत अपराधी बिकरू का विकास दुबे और उसके साथी बेखौफ होकर न सिर्फ अपराध करते रहे बल्कि खाकी से सेटिंग करके बड़े कारनामे करते रहे। ये बात गौर करने वाली है कि विकास को लंगड़ा करना तो दूर उसे कभी खाकी ने छूआ तक नहीं। ऐसा नहीं है कि विकास की कुंडली डीआईजी को नहीं पता था सब जानने के बाद भी शहर के सत्तापक्ष से जुड़े कुछ कथित नेता जिसमें जय बाजपेई, समेत कई विधायक जिन्होंने आज विकास से किनारा किया हुए उनका आर्शीवाद ही पुलिस से बचाता रहा।
सीओ ने दिखायी हिम्मत, तो मिली मौत
बेहद खास सूत्रों की माने तो सीओ बिल्हौर बनने के कुछ माह बाद ही पूर्व सीओ ने विकास दुबे को लेकर डीआईजी को जानकारी दी थी। पर इस कुख्यात अपराधी को लेकर पुलिस विभाग ने कभी कड़ा एक्शन नहीं लिया क्योंकि चौबेपुर पुलिस ने हमेशा उसका बचाव किया था। यही वजह रही कि डीआईजी अनंत देव की तैनात के दौरान तक उसे किसी पुलिस वाले ने नहीं छूआ, उनके हटने के बाद नये आये एसएसपी को चौबेपुर एसओ कैनवंस नहीं कर पाये। एसओ से भिड़ने की जानकारी के बाद ही सीओ ने दिलेरी दिखायी और विकास को पकड़ने के लिये एसएसपी से इजाजत मांगी। इजाजत मिलने के बाद चार थानों की फोर्स ने आपरेशन विकास शुरू किया था।
पुलिस के जानकारों ने कहा
पुलिस के जानकारों ने कहा कि किसी भी थानाक्षेत्र में बड़े स्तर पर कार्यवाही के लिये कप्ततान को सूचना देनी होती है। इस आपरेशन में बिठूर थाने को शामिल किया गया जाहिर है कप्तान को सीओ ने विश्वास में लिया था। अब सवाल ये उठता है कि अगर सीओ ने पूर्व डीआईजी को जो पत्र लिखे थे उसमें विकास का भी जिक्र था, तब क्यों नहीं पूर्व डीआईजी ने उसे पकड़ने के लिये अलग से टीम गठित क्यों नहीं कि, जय बाजपेई के साथ फोटो आने के बाद महकमे में चर्चा है कि अपराधी विकास को नेताओं का संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते वह बचता रहा, इसलिये उस पर हाथ डालने की अनुमति पूर्व डीआईजी ने शायद न दीहो यह आशंका है। पर हालात और वायरल फोटों से जाहिर होता है कि पूर्व कप्तान को विकास के बारे में जानकारी रही होगी पर उस पर हाथ डालने की जुगत किसी ने नहीं उठायी, मतलब साफ है कि पूर्व डीआईजी आपरेशन लंगड़ा पर विकास का खौफ ज्यादा बोल रहा था।
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