क्राइम नम्बर 192@जिसने कानपुर समेत पूरे देश को हिला दिया

मुकदमा अपराध संख्या या क्राइम नम्बर या फिर एफआईआर नम्बर... इस तरह के वाक्यों से लगभग हर किसी का अपनी जिदंगी से पाला पड़ा जरूर होगा। पुलिस की सारी लिखापढ़ी इन्हीं नम्बरों पर चलती है। सुनने में महज एक संख्या और पुलिस विभाग में मुकदमा कहे जाने वाले अपराध संख्या के पीछे का फर्द और कहानी अक्सर भयावह या फिर दुसहासिक हो सकती है। ऐसे ही एक अपराध संख्या से आपको रूबरू कराते है वैसे तो पिछले कई माह से इस कांड के बारे में आप सुन और पढ़ रहे हैं पर कई लोगों के मन में ये सवाल है पुलिस के हाथों मारे जा चुके विकास दुबे और उसके गैंग के लोगों पर दर्ज धाराओं में कौन सा मुकदमा अपराध संख्या उसकी नई पहचान बना हुआ है। 
चौबेपुर थाने, डीसीआरबी और कोर्ट की फाइलों में फीड एक नम्बर मुकदमा अपराध संख्या 192/20 तीन अंकों का यह मुकदमा अपराध संख्या महज तीन अंक नहीं है। बल्कि अपने आप में पूरी कहानी समेटे हुए है। यही वो अंक है जिसने विकास के पूरे अपराधिक कुनबे में आग लगा दी। 
कैस्े दर्ज हुआ ये मुकदमा 
2/3 जुलाई की आधाी रात को बिकरू गांव में दबिश देने गये सीओ बिल्हौर देवेन्द्र मिश्रा, एसओ शिवराजपुर, मंधना चौकी इंचार्ज समेत आठ पुलिस वालों को गोलियों से छलनी करने के ठीक 18 घंटे बाद चौबेपुर थाने में एक मुकदमा दर्ज होता है। ये मुकदमा संख्या है 192/20 जिसमें हत्या, बलवा, लूट, साजिश जैसी संगीन धाराओं दर्ज है। इसी के साथ शुरू होता है मुकदमा अपराध संख्या 192/20 में पुलिसिया कार्यवाही का दौर। घटना के तीन घंटे के भीतर विकास दुबे के मामा प्रेम प्रकाश, अतुल दुबे, फिर अमर दुबे,उसके बाद प्रभात, और बउउन को निपटाने के बाद इस मुकदमें में हर घंटे फर्द के पन्ने बढ़ते चले गये। अब तक तीन सौ पन्नों की फर्द बन चकी है। 
इस बीच 10 जुलाई को विकास दुबे को ढेर करने के बाद सरेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई पर यह मुकदमा संख्या अभी भी न जाने कितनों की बलि लेगा। 
मुकदमा अपराध संख्या क्या है
पुलिस विभाग में मुकदमा अपराध संख्या एक अपराधी या घटनाक्रम की पहचान है। पुलिस थाने से लेकर कोर्ट की दहलीज तक यह मुकदमा अपराध संख्या ही अपराधी या घटना की पहचान होता है। बिकरू कांड में अब तक इस मुकदमें की भेंट 26 लोग चढ़ चुके है। और आगे भी किये जायेंगे, क्योकिं क्राइम नम्बर 192/ को अंजाम देने वालों ने पुलिस पर गोलियां चलाई हैे। 
पूरे देश को हिला कर रख दिया था।
बिकरू कांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। आठ पुलिस वालों की हत्या के बाद विकास दुबे की राजनीज्ञि अकड, पुलिस पकड़ ने उसे दुर्दांत अपराधी बना दिया था। करोड़ों से खेलने वाले विकास दुबे की खुद की बिकरू में छोटी सरकार चलती थी। पर एक गलती ने उसे मौत के मुंह तक पहुंचाया तो एक मुकदमें ने उसकी स्याह जिनंदगी  को अंत दे दिया। 
बस यही पहचान है पुलिस रिकार्ड में 
क्राइम नम्बर 192/20 चौबेपुर थाने में दर्ज वह मुकदमा है जिसे आज से कुछ साल बाद एक सबक के तौर पर याद किया जायेगा। हत्या, लूट बलवा जैसे मामलों की जब भी बात होगी इस मुकदमाअपराध संख्या का जिक्र जरूर होगा। शहर में कोई भीनया अधिकारी आये, उसे विकास नहीं बल्कि इसी क्राइम संख्या के सहारे आगे की कार्यवाही करनी होगी। कोर्ट में विकास दुबे और उससे जुड़े लोगों की अगली पहचान यही मुकदमा है।

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