पत्रकार बोल रहे है...यूट्यूब वाले.. और फिर हो गयी कुटाई

दोपहर के करीब एक बजे होंगे, एक थाने के बाहर से गुजर रहा था, वहां कुछ पत्रकार महोदय जिनके पास चैनल की आईडी थी। पत्रकार हूं सो मै भी रूक गया। सोचा इतने सारे पत्रकार भाई है तो कुछ बड़ा मामला होगा। थाने के बाहर जाकर मै भी वहां खड़ा हो गया। एक पत्रकार महोदय लगभग किनारे करते हुए कहा यहां क्यों खड़े हो, मैने पूंछ लिया कि क्या मामला हुआ तो कहने लगे यूटयूब पर देख लेना, और कुछ बताया कि हैसटैग लगाकर ये सर्च कर लेना, हमने भी सर हिला दिया। वहां से जाने ही वाला था कि वहां पर दो महानुभाव और पहुंच गये। मुंंह में सिगरेट थी, आते ही तीन चार जो पहले से मौजूद थे वे सब किनारे हो गया, वो महानुभाव एक महिला और युवक को अपने साथ किनारे ले गये, कुछ समझा दिया, थोड़ी देर बाद थानेदार साहब आये दो बड़े वाले पत्रकार अंदर गये, थोड़ी देर बाद बहार आये बोले चलो काम हो गयाद्व उसके बाद यूटयूब के सभी पत्रकार वहां से दोनों पीड़ितों को लेकर एक दुकान के करीब पहुंच गये। मेरे भी सुलेमानी कीड़े थे सो हम थाने के अंदर गये, थानेदार साहब मिले और पूंछा क्या मामला है, अंदर जाने से पहले पीड़ित का नाम और मोहल्ला तो पूंछ ही लिया था, थानेदार ने कहा मुझे नहीं मालूम कहां क्या हुआ है, मैने बताया कि दो पत्रकार साहब अंदर आये थे, उन्होंने कहा रोज आते है मुझसे तो नहीं मिले, मै भी सर खुजाते हुए बाहर आ गया। करीब दो दिन बाद अचानक व्हाटसएप पर पढ़ा की फला क्षेत्र में पत्रकार को पीटा, दी धमकी, पत्रकार साहब की फोटो भी आयी थी, देखते ही मुड खराब हो गया कि हमारे पत्रकारों साथियों पर इतना जुल्म क्यों, थानेदार को फोन कर दिया कि साहब न्याय दो, उन्होंने बताया कि साहब आप हमे न्याय दो, इन महोदय के चक्कर में मेरे बड़े साहब हमसे सवाल जवाब कर रहे है। फिर उन्होंने एक नम्बर दिया कहां इनसे बात करों तो पता चलेगा मामला क्या है। 
अब सुनिये असली कहानी
मैने उक्त नम्बर पर फोन किया, वहां से एक महिला ने फोन उठाया, अपना परिचय दिया कि फलां अखबार में पत्रकार हूं और बर्निंग न्यूज का यूटयूब चैनल भी शौकिया चला लेता हूं,यूटयूब का नाम सुनते ही भड़क गयी। मैने उन्हें समझाया कि सब एक जैसे नहीं होते है यूटयूट चैनल तेजी से असर दिखाता, संविधान में भी काम करने का अधिकारी बस जो गाइड लाइन है उसे फालों करना जरूरी होता है। थोड़ा शांत हुई बताया कि मेरे पड़ोसी से नाली का विवाद हुआ था, वो थाने पहुंच गये वहां वहीं पत्रकार जिन्हें मेरे लौंटे ने पीटा है वो मिल गये और पड़ोसी को न जाने क्या समझा दिया, उसके बाद बेटे पर छेड़छाड़ का मुकदमा लिखाने की धमकी देकर उल्टी सीधी खबर चला दी, पुलिस घर आयी थी बेटे को उठा ले गयी। संभ्रात लोग बीच में पड़े तो पड़ोसी ने भी गलती मानी और कम्पलेन वापस ली, तब तक मेरे घर में रखे गांधी जी खर्च हो चुके थे, बेटे ने गुस्से में पीट दिया। मैने कहा ये तो गलत है कानून हाथ में नहीं लेना चाहिये, उन्होंने तपाक से कहा पत्रकार बनकर ये जो कर रहे है ये क्या है। फिर से सर खुजाने लगा। 
दूसरा मामला तो इससे भी ज्यादा रोचक है
हरबंश मोहाल में एक ट्रस्ट की जमीन पर काबिज कब्जेदार ने लिंटर डलवाना शुरू कर दिया। यूटयूब वाले साहब पहुंच गये और ट्रस्टी को ऊंगली कर दी, ट्रस्टी भी ऊंगलीबाज निकले, मामला फंस गया। अब दोनों तरफ से पत्रकार समूह ने पैचवर्क किया, पचास में सौदा तय हो गया, थाने की सेटिंग पत्रकार महोदय ने अपने सर ले ली, पर नाश हो ऊंगलीबाज पत्रकारों को पुलिस को जानकारी दे दी। दोनों तरफ से सिर्फ गालियां मिल रही है।
तीसरा मामला तो हद से ज्यादा गुजर गया
तीन चार पत्रकार समूह आईडी लेकर पहुंच गये एक ग्रामीण क्षेत्र में वहां एक जमीनी विवाद में पड़ गये। पैसे ले लिये कि कब्जा करा देंगें, जिसकी जमीन थी वह कुछ पागल किस्म का था, और कागज से भी मजबूत था, उसने समझाया कि इस मामलें में न पड़ो, नहीं माने भाई लोग, पुलिस थाने में गलतमैसेज चलाकर पुलिस पर दबाव बनाया, पुलिस ने मौके पर जाकर दोनों पक्षों को समझा दिया कि यथास्थिति बनाये रखे, तब तक हजारों का खेल हो चुका था, मकान मालिक को पूरी रील पता चला, पत्रकार महोदय को खोजने लगे और खोज लिया एक गुर्गे को फिर कूटाई कर दी, गैंग के बड़े पत्रकार साहब तो खुद को बचाकर भाग निकले।
आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले दस दिन में यूटयूब के कुछ पत्रकारों की कुटाई हुई है, पुलिस भी परेशान है इनकी खबरों से और पुलिस खुश हो जाती है जब यही उनकी अच्छी बढ़ाई करते है। 
ये कुछ मामले है जो सामने आये, है व्यक्तिगत रूप से भी कईयों को जानता हूं जो क्या कर रहे है।
यूटयूब चैनल बड़ा माध्यम है खबरों को तेजी से प्रसारित करना, सिर्फ लालच में पत्रकार बन गये, उगाही करना ही शगल है तो यूटयूब हो या बड़ा संस्थान उसे दलाल ही कहा जायेंगा, डिजिटल मीडिया वर्तमान वक्त की मांग है। 
पर कुछ लोग जिनमे अपराधी, भी शामिल है यूटयूट चैनल बनाकर पूरा गैंग चला रहे है, मै सिर्फ इतना कहूंगा, भाई खबरें बनाओ, खबरे चलाओ कोई नहीं रोकेगा, पर खबरों के नाम उगाही और असली मामले से हटकर बेवजह के मामले बनाकर  जो माहौल बनाते हो उससे मीडिया की दुगर्ति हो जाती है। पुलिस भी परेशान, पीड़ित भी परेशान और प्रतिवादी भी परेशान। पनकी में लूट के जिस मामले में संजीत हत्याकांड का आरोपी रामजी पकड़ा गया उसके साथ भी यूटयूब के कुछ पत्रकार उगाही करने में आगे रहे है। 
मेरा उद्देश्य किसी भी यूटयूब चैनल चलाने वाले मान्यवर की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था, पर उस महिला के शब्द कान में गूंज रहे थे ऐसे टयूब वाले तो रोज पिटने चाहिये। 
बाकी गुस्ताखी माफी...फिर भी किसी महोदय को भड़ास निकालनी हो तो मेरा नम्बर 9305120350 पर भड़ास निकाल सकता है।

Comments

  1. जो सही बात है उसका तो समर्थन करना भी चाहिए। जबकि कुछ तथाकथित पत्रकार डिजिटल मीडिया में अपनी घुसपैठ बना कर उगाही और ब्लैक मेलिंग का धधा कर रहे है। बिल्कुल सही और बेवाक बात।

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    1. आपका सुक्रिया किसी ने सही माना

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  2. इस समय तो यू टयूब वाले पञकारो की बाढ आइ है

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  3. भाई आपकी लेखनी अत्यंत उत्तम है, और अंदाज़ रोचक, किंतु ये सत्य है कि अब पत्रकारिता का स्तर यूट्यूब पर भरमार हुए चैनल गिरा रहे हैं ।

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