बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले... जितने भी निकले मेरे अरमान कम निकले
पर उफ ये तेरी बेशर्मी का आलम तेरे अपनो की जान जाने के बाद भी
हम जय विला से नही निकले
3 जुलाई की सुबह शहर के सभी बड़े पुलिस अफसर लगभग पुलिस वाले जब अपने पुलिस साथियों की खून से रंगी वर्दी देखकर गम और गुस्से में थे
उसी वक़्त कई ऐसे भी बेशर्म पुलिस वाले थे जो वर्दी में गद्दारी की इंतहा कर रहे थे।
बिकरु में 8 पुलिस वालों की लाशें और उसके बाद जो कुछ सामने आए उससे सिपाही से लेकर dig रेंक के अफसर तक कठघरे में खड़े हो गए।
तो ऐसे में दरोगा कहाँ पीछे रहते।
गुरुवार को ig कानपुर के काआदेश पर जबविकास दुबे के खास जय बाजपेई के विवादित मकान में छापा मारा तो वहां तीन दरोगा रहते पॉय गए है
एक है राजकुमार कर्नलगंज वाले। इनकी कलम के कारनामे सबको पता है, पशु तस्करों से लेकर मुकदमो में खास तौर पर मकान के मामलों में इनका खेल जगझिर है।
दूसरे है मिया उस्मान ,जो सिपाही से दरोगा बने,
तीसरे है खालिद मियां,
सवाल ये नही की जय के मकान में ये कैसे रह रहे थे।
सवाल सीधा सा ये है अफसर अब ही क्यों जागे, सभी को पहले पता था।
जय के राजमहल में कई पुलिस वाले मेहमान रहे है,महफ़िल भी खूब सजी
इसके बदले उसे महकमे की हर राज बताये जाते रहे।
ऐसे में इन खाखी वालो पर यकीन जनता कैसे करे
जो अपने महकमे के नही वो जनता के कैसे।
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