मेरी कमसिन जवानी.. मांगे पानी पानी... बालीवुड के इस उत्तेजक सॉंग को अक्सर डीजे बजते सुना होगा, पर कानपुर में कमसिन जवानी को वाकई पानी पानी होते देखना है तो वह भी मुशकिल नहीं है। जीं हां ऐतिहासिक धरती कानपुर का अपना अलग इतिहास है, यहां लड़कियां बढ़ों को देखकर सर पर दुपटटा आज भी डाल लेती है... पर आधुनिकता की दौड़ में दौैड़ रहे कानपुर में इन दिनों अशलीलता चरम पर है क्योंकि हिलोरे मार रही जवानी को बेशर्मी की रंगीन राते दी जा रही है वो भी महज कुछ पैसों में । हम बात कर रहे शहर के कुछ होटलों और हुक्काबार व आउटर में फार्म हाउस की जहां देर रात तक कम उम्र की लड़कियां कहीं हुक्का तो कहीं कार में बज रहे लाउड म्यूजिक की थीम पर थिरकते दिख जायेंगी। पर इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
इन दिनों शहर के हर इलाके में हुक्का बार प्रथा तेजी से पनप रही है। यहां लड़के लड़कियां शाम ढलते ही पहुंचने लगते है। हुक्के को गुडकने के बाद धुंए का छला और बीयर के सिप के साथ लड़कियों को अशलीलता करते आराम से देखियों क्योंकि आधुनिकत में से फैशन है। एक हुक्का बार मै भी चला गया, गाने भी खूब बज रहा था मेरी कमसिन जवानी मांगे पानी पानी.. कुछ कमसिन वहां पर थिरक भी रही थाी, ये हाल सिर्फ एक हुक्का बार का था, आर्य नगर, स्वरूप नगर, जाजमऊ समेत कई ऐसे हुक्काबार है जहां ये रोज का ड्रामा है, पैसा कमाने की होड में कम उम्र के लड़के लड़कियों को अय्यश ी का पूरा सामान यहां उपल्ब्ध हो जाता है। बाकी की कमी होटल वाले कर देते है किसी भी लड़की को ले जाओ, एक हजार में तीन चार घंटे के लिये कमरा बुक, पुलिस का डर भी नहीं क्योंकि दस से बीस हजार महिना पुलिस मेहनताना जो लेती है। अब पुलिस भी बेचारी क्या करे, इतना लोड पहले से है ऐसे में हुक्काबार का लाईसेंस लेकर हुक्का बार वाले ये सब नहीं करायेंगे तो क्या करायेंगे।
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