जो ठोकते थे साहब को सलाम, उन साहब के स्वार्थ ने लगवा दिया काम

कहते है जब अपने ही आस्तीन का सांप बनते है तो अंजाम खौफनाक ही होता है,chaubepur के बिकरु में 3 जुलाई की भोर से चंद घंटे पहले पुलिस का शिकार करने वाले विकास दुबे के मंसूबे जो रहे उनकी सजा उसे मिल गयी पर उस कांड के बाद एक के बाद सामने खुल रही खाखी की करतूत ने पूरे महकमे को दागदार कर सिया है बड़ा सवाल है किया सिर्फ 8 पुलिस वालों की हत्या सिर्फ एक घटना थी । मैं इस घटना और इससे जुड़े लोगों को दूसरे नजर से देखता हूं ।
सबसे पहले बात पुलिस की
विकास दुब से एक एसओ की यारी समझ आती है पर बहुत कम ऐसा होता है या सुना होगा कि किसी बड़े अफसर ने किसी अपराधी को सह दी। शायद ये कानपुर के तत्कालीन dig अनंतदेव पर फिट बैठता है। आज वायरल हुई तीन ऑडियो तो बानगी भर है। एअसे कई ऑडियो और भी थे जो वायरल होने से पहले रोक लिए गए। बात तकरीबन 11 माह पुरानी है। बेहद खास सूत्र बताते है कि इसी कानपुर में सचिन तांगड़ी समेत पांडे परिवार की जुगलबंदी में तत्कालीन dig को खूब माल दिया। जिसके नतीजा यह रहा कि होटल संचालक को महज एक दो मुकदमो के आधार पर गैंगस्टर बना कर जेल भेज दिया गया।
इस खेल में co देवेंद्र मिश्रा ने सही जांच के लिए एक co को फोन किया था जिसके चलते रातों रात उनखा बिल्हौर ट्रांसफर किया गया। नोट बंदी के दौरान तत्कालीन अधिकारी पर हवाला का पकड़े गए पैसो का मामला सेट करने में 10 लाख लेने का एक ऑडियो वायरल हुआ। और एक घण्टे में ही अब मैनेज किया गया  ऐसे बहुत से कारनामे कानपुर में एक अधिकारी के कुछ लोगो की जुबानी है।
विनय तिवारी हर माह देता था दो लाख
आरोपी चुबेपुर का एसओ विनय तिवारी हर माह दो लाख एक खास अफसर को देता था ऐसा हम नही थाने के सिपाही और खुद विनय उन लोगो से कहता था जिनसे हर माह वसूली होती थी। अब आप सोच रहे होने इस थाने में ऐसा किया है जो इतनी रकम मिक्ति है। इस इलाके में एक विकास का खास कटियार नाम का व्यक्ति जुआ खिलवाता था रोजाना 4 से 5 लाख जा जुआ होता है, अवैध शराब के साथ खनन के कई ट्रक बिठूर रॉड से वाया बंदी माता मंदिर और थाने के पास निक्कते थे। रात में jcb से अवैध खुदाई के लिए नामी सुल्तान भाई से 50 हजार बंधा था। सबसे बड़ा धंदा तो उधोगपति से जमीनों पर कब्जे के नाम पर लिया जाता था।
अधूरी है ऑडियो अभी कुछ और सामने आना बाकी
दिवंगत co देवेंद्र मिश्र के ये ऑडियो अभी पूरे नही है एअसे कई ऑडियो है जिमसें उन्होंने तत्कालीन dig और विनय तिवारी समेत कई और थानेदारो की पोल खोली है। ऊपर के अफसर को चढ़वा देने के चलते ही co सिर्फ नाम के रह गए थे। मनमानी का आलम यह था कि कई मुकदमो में si मनमानी करने लगे थे। 
तीन दिन में बना दिया गैंगस्टर
तत्कालीन dig सचिन तांगड़ी, केशव पांडे, विवेक नाम के शख्स की तिगड़ी के बाद धोखाधड़ी के उन मामलों जिनमे लिखापढ़ी ने पैसा लेने और देने के sachy थे बावजूद इसके होटल संचालक को गैंगस्टर बना दिया। ये वही होटल संचालक है जिनकी कोचिंग प्रख्यात है, जिन मामलों में उन्हें लपेटा गया ऐसे कई मामले सहहर के बड़े लोगो पर चल रहे है लर उन पर ये कोपभाजन नही हुआ। तत्कालीन अधिकारी ek co और इन तीन मठाढ़ेसो की लोकेसन काल डिटेल ही काफी है ये बताने के लिए पैसों के लिए पुलिस के बड़े अफसरों ने कैसे ईमान बेचा

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