वो करीब सात या आठ साल की रही होगी.. मासूम सा चेहरा. एक अस्पताल के बाहर गुमसुम बैठी थी.. अंदर उसकी मां भर्ती थी.. डॉक्टर अंकल ने कहा था जल्दी मम्मी ठीक हो जायेगी
अचानक उसके पापा आंखों में आंसू लिये आते है, और उसे गले लगाकर रोने लगते है। थोड़ी ही देर में अस्पताल वाले बुलाते है और मोटा बिल थमाकर कहते है पैसा जमा कर दीजिये और लाश ले लिजिये.. ये सब सुन रही है उस बच्ची को लाश का मतलब नहीं पता था, पर पिता के आंसू उसे अहसास दिला रहे थे कि मां के साथ कुछ हुआ है। मासूमियत से पूंछा पापा मां आयेगी की नहीं... ये नजारा किसी फिल्म का नहीं बल्कि शहर के हर दूसरे तीसरे अस्पताल में रोजाना देखने को मिल जायेगा।
ाकुछ दिन पूर्व एक फिल्म आयी थी गब्बर.. इस फिल्म में मिर्च मसाला भले ही फिल्मी स्टायल का था पर फिल्मी में अस्पतालों को लेकर दिखायी गयी हकीकत वर्तमान समय में बेहद सटीक बैठ रही है।
कोरोना काल के बाद मंदी का रोना रोने वाले अस्पतालों ने कैसे मरीजों को लूटते है कैसे धमकाते है ये किसी छूपा नहीं है। हद तो यह है कि सीएम, से लेकर शहर के उच्चाधिकारियों की फटकार भी सिर्फ मजाक बन कर रह गयी है।
बेहतर इलाज का दावा करने वाले अस्पतालों की सूची यूं तो बड़ी लम्बी है।
पर इलाज के नाम पर कैसे खेल होता है। ये सभी समझ रहे है। जीटी रोड किनारे कुछ अस्पतालों के तीमारदारों के दर्द ये आपको रूबरू कराते है। किसी भी बीमारी के लिये यहां आने वाले मरीजों को कोरोना के नाम पर डरा कर मोटी रकम जमा करायी जाती है।
मै बात किसी एक अस्पताल की नहीं कर रहा हूं। बल्कि उन सभी अस्पतालों का ये हाल है जहां मरीजों की हर सांस की कीमत वसूली जाती है।
कल्याणपुर के पांच अस्पतालों के बारे में जानकारी जुटायी तो पता चला की तीन दिन में एक मरीज से एक लाख रूपये तक चार्ज किये गये है। किसी को किडनी, किसी को लीवर में दर्द, या इंफेक्शन की शिकायत थी। कोरोना के नाम पर लूट का मामला सिर्फ कानपुर में ही नहीं है। बल्कि पूरे प्रदेश में फैला है।
लखनऊ के एक बड़े अस्पताल सहारा का हाल सुन लिजिय, कानपुर के एक परिवार ने बताया कि उनके यहां की महिला का एक्सीडेंट हो गया। सर में चोट आयी, वहां पर भर्ती कराया गया। हर तीसरे दिन मरीज और मिलने जाने वालों की कोविड जांच के 11 सौ रूपसे लिये जाते है। मरीज की दस दिन बाद की गयी जांच में वह कोरोना मिली तोउसे निकाल कर बाहर कर दिया।
अब सवाल सीधा है जब महिला दस दिन से भर्ती थी, तीन रिपोर्ट निगेटिव आयी तो चौथी रिपोर्ट पाजीटिव कैसे, यानी लापरवाही अस्पताल से हुई।
कानपुर के साउथ सिटी में स्थित रिजेंसी अस्पताल का मामला तो सुर्खियों में है जहां चंद दिनों में 11 लाख वसूलने के बाद मरीज के साथ जो हुआ वह कितना दुखदायी थी।
सबसे ज्यादा अस्पताल भी साउथ ओर कल्याणपुर में है। इन्हीं अस्पतालों में एक नारायणी, अस्पताल का नाम सुर्खियों में रहा है, वहीं केशवपुरम में दो अस्पतालों में भी मरीजों के साथ लापरवाही की गयी। सवाल सीधा है ये अस्पताल क्या सिर्फ धंधा करने के लिये ही है इनके अंदर इंसानियत बिल्कुल भी नहीं बची। क्यों नहीं प्रदेश की सरकार कड़ी कार्यवाही करती है।
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