हाथरस: दर्द भरी चीखों,सिसकियों पर भारी up का राजतंत्र

मां तुम परेशान न होना, मै इस्वर के घर में सुरक्षित हूं, बस इस बार उनसे कहा है कि मुझे अगले जन्म भी बिटिया ही कीजो... बस यूपी में पैदा न कीजो...
मां, उन दरिन्दों ने मेरा जिस्म बुरी तरह नोंचा था, मारा पीटा, सब दर्द बर्दाश्त कर लिया,
पर आखरी बार तेरे हाथों का स्पर्श चाहिये थे, मुझे भी ये तो संविधान मरने के बाद ही सही सम्मान का हक देता है
मेरी क्या गलती थी। मेरे यूपी के भाई बहनों बताओं मेरी क्या गलती थी, मैने तो कभी पुलिस को गाली तक नहीं दी, मुझे जानवरों की तरह उठा कर गाड़ी में ले गये और जला दिया। न रिति न संस्कार, बाबाजी आपने तो कहा था बेटियों पर अत्याचार करने वालों के घर बुलडोजर चला देंगे, मेरी इज्जत की कीमत आप ने जो लगायी शायद मेरा परिवार पूरी जिंदगी में इतना नहीं कमा पाता, पर मै जीना चाहती थी। 

कौन कहता है यूपी पुलिस में मानवता नहीं है.. लॉकडॉउन में पैदल चल रहे लोगों पर अगर लाठिया बरसायी थी तो उन्हें खाना भी खिलाया था। पर मजबूर है नेताओं के सिस्टम के सामने तभी मानवता की लॉज रखते हुए गरीब परिवार के सर से अंतिम संस्कार का बोझा कम कर दिया।
 अब ये नेताओं को देखो पुलिस को कोस रहे है। छी कितनी गंदी सोंच है। अरे अतिंम संस्कार का हक ही तो छीना है, ठीक वैसे ही जैसे दरिंदों ने यूपी की बिटिया के शरीर को नोंच कर बेरहमी से जख्मी कर दिया और मौत तक पहुंचा दिया। अब क्या पूरी सरकार ले लेगा किया परिवार, 25  लाख दे दिये, नौकरी दे दी, एक घर दे दिया। परिवार वालों को थोड़े ही न पता था कि एक बेटी की इज्जत और जान की कीमत इतनी ज्यादा मिलेगी, नहीं तो यूपी सरकार और पुलिस के निकम्मेपन पर ऐसी दस बेटियां कुर्बान कर दे। 
अरे पुलिस ने तो मानवता निभाई है,  वो पुलिस जो खुद अपने परिवार के  बच्चे को भगवान श्री राम के कदमों पर चलने की हिदायत देते है, वहीं पुलिस। कितना नेक काम किया, संसकारों, धर्म शास्त्रों से इतर रात में एक बेटी का लावारिश की तरह अंतिम संस्कार कर दिया। अगर सुबह हो जाती तो हजारों की भीड़, नेता, मीडिया चीख चीख कर पुलिस की नाकामी और यूपी के बाबा को ऐसे दोषी ठहराते मानों रेप करने वाले चारों दंरिदें उन्रे रिश्तेदार हो। 
अब यूपी में बेटियों की इज्जत लूटना, उनहें मारना कौन बड़ी बात है।
हॉ बड़ी बात होती अगर गाय मार दी जाती या फिर अखिलेश, माया की सरकार होती। यहां तो हर रोज किसी न किसी बेटी की इज्जत लूटती है,। दूसरी पार्टी में रहने वाले नेता इनकी पार्टी में आते ही आदर्शवादी बन जाते है। फिर चाहे वह रेपिस्ट क्यों न हो। अरे भई जब कुलदीप सेंगर, चिन्मियानंद को बचा लिया गया, तो इस परिवार को तोड़ने के लिये कुछ लाख रूपये और फेंक देगी सरकार। 
अब देखिये न यक गरीब परिवार अपनी बिटिया की शादी करता, तो पैसा खर्च होता, मरने के बाद अंतिम संस्कार करता तो पैसा खर्च होता, उनका काम पुलसि ने कम कर दिया। रातों रात अतिंम संस्कार कर दिया। और रेप के बदले सरकार ने मुआवजा दे दिया।  सबसे बड़ी बात ये मीडिया रेप रेप चिल्ला रहा है, अरे भईया क्यों नहीं मानते इस सरकार में रेप हो ही नहीं सकते, क्योंकि डॉक्टर इनके, पुलिस इनकी,फॉरेन्सिक टीम इनकी, और अब तो शव भी जला दिया। मरने से पहले उस मासूम ने बताया था कि चारों ने उसके जिस्मे को नोंचा था, तो क्या हुआ, पुलिस है न उसके बयान को झूठा बताने के लिये। हाथरस की बेटी तुम भगवान से कोई शिकायत न करना, क्योंकि यूपी वालों को भगवान से ज्यादा सरकार पर भरोसा है। वैसे भी गाय से बढ़ कर तुम्हारी इज्जत या जिंदगी थोड़े ही नहीं है...
और सुनों तुमने तो बेटी होते हुए परिवार को लखपति बना दिया, घर दिला दिया, सरकार ने तो पहले ही कहा था बेटी बचाओ... इसलिये भगवान से ये मत कहना कि अगले जन्म मोहे बिटिया न किजो...
बहन हम शर्मिंदा, रहनेगे, कियोंकि तेरे दरिंदे जिंदा रहनेगे
तेरे दर्द को जीतना महसूस किया,  जानता हूँ दर्द उससे कहीं ज्यादा है,  बस कोशिस की है इन्हें अपने शब्दों में बयान करने की।
पठान

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