तत्कालीन dig ने सुनी होती शहीद co की बात तो न होता इतना बड़ा कांड

देश को हिलाकर रख देने वाले चौबेपुर के बिकरु कांड में सिर्फ 8 पुलिस वालों का ही कत्ल नही हुआ था, बल्कि इस कांड के बाद जो परते सामने उससे जाहिर हो गया कि पुलिस महकमा हर रोज इंसानियत का कत्ल कर रहा था। पैसो के लिए फर्जी मुकदमे, मुठभेड़ में पैर में गोली मारने से लेकर थानों में कम अनुभव वालो को पोस्टिंग देकर पूर्व dig ने मनमानी में कोई कसर नही छोड़ी। वायरल आडियो चीख चीख कर कह रहे है पूरे घटनाक्रम को रोका जा सकता था अगर तत्कालीन dig ने co की बात सुनी होती। 
 वहीं जय बाजपेई से सम्बंध और विकास दुबे पर कार्यवाही न  करने से विवादों में आये तत्कालीन डीआईजी अनंत देव की मुशकिले बढ़ती दिख रही हैै। सूत्रों की माने तो एसआईटी की जांच में  उन्हें ही पूरे घटनाक्रम में घोर लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। हालाकिं एसआईटी की जांच और तत्कालीन डीआईजी को लेकर क्या टिप्पणी की गयी इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। 
तत्कालीन डीआईजी अनंत देव के कार्यकाल के दौरान कई बार पुलिस की कार्यवाही विवादों में रही। सीसामऊ में एक बदमाश को मुठभेड़ में पैर में गोली मार कर जेल भेजने के मामले में आरोपी की पत्नी ने आरोप लगाया था कि कई सालों से अपराध छोड़ चुके उसके पति को आईसक्रीम बेचते वक्त पुलिस उठा ले गयी और पैर में गोली मार दी। सूत्रों की माने तो पूर्व एसएसपी पीआरओ के फोन से जय बाजपेई की बात होती रही है। जय पर कई मुकदमें थे ये पुलिस जानती थी बावजूद इसके डीआईजी का करीबि होने के कारण जय पर पुलिस ने हाथ नहीं डाला। बिकरू कांड से कुछ दिन पूर्व ही ट्रान्सफर हुए डीआईजी अनंत देव के खास रहे एसओ महेश यादव, चौबेपुर एसओ विनय तिवारी, कई एसओ उनके इशारे पर काम करते रहे। सूत्रों की माने तो विकास दुबे के अपराधों की पूरी जानकारी होने के बाद डीआईजी ने कार्यवाही नहीं करने दी।शहीद सीओ के वायरल आडियों में भी इसका जिक्र रहा है। शहर और पुलिस विभाग में चर्चा भी जोरो पर है तत्कालीन डीआईजी अंनत देव ने शहर में जमकर लूट खसोट के साथ सामानंत सरकार चला रहे थे। जिससे भाजपा सरकार की साख पर बटटा लग रहा हैै। sit की जांच की लड़ते सामने आते ही कई और बेनकाब होंगे पर इसमे सरकार की किरकिरी भी तय है जो ईमानदार मुख्यमंत्री के साख पर विपछ को तीर चलाने का मौका देंगे।

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