बिकरु कांड: रिकार्डिंग वायलर करने का मास्टर माइंड कौन? dig पर कार्यवाही होते ही वायरल गैंग शून्य


पुलिस विभाग के लिये 2 जुलाई कभी न भूलने वाला वो काला दिन है जब कानपुर पुलिस ने अपने आठ पुलिसकर्मियों को खोया था। भले ही पुलिस ने अपना बदला लगभग ले लिया हो पर कई सवाल मन को कचोटते है कैसे एक मामूली गुंडा खाकी, खादी के साये में इतना बड़ा हो गया कि उसे पालने वाली खाकी ही उसका शिकार हो गयी।

यहां ये जानना जरूरी है कि हुआ क्या था
दो जुलाई को एक मामूली से मुकदमा दर्ज होने के बाद आखिर विकास इतना उग्र कैसे हो गया कि उसने अफसरों की सरपरस्ती के बाद भी इतनी बैड़ी घटना को अंजाम दे डाला।  कोई था जिसने सीओ देवेन्द्र मिश्र से चल रही अनबन का फायदा उठा कर उसे भड़काया था। ये सवाल उसकी पत्नी श्रृचा ने भी किया था।
इस घटना के बाद पुलिस एक्शन में चल रही थी, कि घटना के ठीक बीस दिन से सीओ देवेन्द्र मिश्रा और पूर्व डीआईजी, समेत कई पुलिस वालों की रिकार्डिंग एक के बाद एक वायरल होनी शुरू हो गयी।
इन आडियों से एक बात तो साफ हो गयी थी कि विकास यूं ही बड़ा गुंडा नहीं बना था, घर के भेदियें और उसके खास गुर्गो ने धन, बल, राजनीति के दम पर खाकी को नौटंकी बना रखा था।

पर ध्यान देने वाली बात यह रही कि जैसे ही इस मामले में डीआईजी अनंत देव पर शासन ने कार्यवाही की अचानक से आडियों वायरल होना बंद हो गयी।
बेहद खास सूत्रों या यूं कहे की शहीद सीओ के परिजनों ने आडियों की जानकारी से इंकार किया , पर बड़ा सवाल कि सीओ का मोबाइल किसके पास है सरकारी और प्रार्इ्रवेट दो मोबाइल मिले पर तीसरा मोबाइल नहीं मिला।
कौन है जिसने गूगल ड्राइव में पड़ी चार हजार से ज्यादा रिकार्डिंग निकाल कर उनमें से छांट छांट कर वायरल की।
बता दे कि आम तौर पर किसी मोबाइल में दो सौ से एक हजार तक रिकार्डिंग सेव होती है, कई रिकार्डिंग घटना के करीब दो माह तक पुरानी है, ज्यादातर सरकारी नम्बर पर कॉल की रिकार्डिंग थी।
पूर्व डीआईजी सस्पेंड होते ही रिकार्डिंग वायरल नहीं हो रही है, पर सूत्र बताते है कि कुछ ऐसी रिकार्डिंग भी है जिसमें सीओ से लेकर कुछ पुलिसकर्मियों के बीच बड़ी डील को लेकर बहस हुई थी।
पुलिस ने आज तक ये पता करने की कोशिश नहीं की कि आखिर ये रिकार्डिंग कौन वायरल कर रहा है,

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